कभी खुशी कभी गम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


कभी खुशी और कभी ग़म की छाया

जीवन में दोनों का अपना महत्व है

ग़म की छाया जो न जीवन पर पड़ती

खुशियों के पुष्प कभी न खिलते

प्रेम के अनंत आकाश में

उम्मीद का सुरज कैसे उगता

मायूसी के अंधियारे को 

विश्वास का दीपक ही मिटाता

चार दिनों की जिंदगी है

दिन का उजाला कर्तव्य राह बतलाता

रात का अंधियारा

श्रम करने को तैयार है करता

खुशी और ग़म दोनों ही जरूरी हैं

दोनों में जो संयत रहता

जीवन पुष्प तभी तो खिलता

अपनी खुशबू से चमन महकाता


  अनुराधा प्रियदर्शिनी

  प्रयागराज उत्तर प्रदेश