हृदय रोगों के खतरे से बचाएंगे ये योगासन

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

पिछले एक दशक में जिन बीमारियों का खतरा सबसे अधिक बढ़ा है, हृदय रोग उनमें से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार हृदय रोग, दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। जीवनशैली और आहार में गड़बड़ी के कारण इस रोग के मामले काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। कुछ वर्षों पहले तक जहां हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों के रूप में देखा जाता था, वहीं अब बहुत ही कम उम्र के लोग भी इस गंभीर रोग की चपेट में आते जा रहे हैं। योग, शरीर में लचीलापन और संतुलन में सुधार के लिए जाना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि योग हृदय के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा दे सकते हैं?

योग विशेषज्ञों के मुताबिक दैनिक जीवन में योग को शामिल करके रक्त प्रवाह को बढ़ाकर हृदय स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। इसके अलावा जो लोग नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं उनमें हृदय रोगों का जोखिम भी अन्य लोगों की तुलना में कम होता है। हृदय रोग से बचने के लिए किन योगाभ्यास को करना फायदेमंद हो सकता है।

हृदय रोग और योग का अभ्यास

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक योग का अभ्यास करने से रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर के साथ-साथ हृदय गति को कम करने में भी मदद मिल सकती है। उच्च रक्तचाप के कारण स्ट्रोक और हृदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है। नियमित रूप से योग का अभ्यास करके न सिर्फ रक्तचाप को नियंत्रित रखा जा सकता है, साथ ही यह हृदय रोगों के जोखिम को भी कम कर देता है।

ब्रिज पोज का अभ्यास

योग विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रिज पोज या सेतुबंधासन योग का अभ्यास करना हृदय रोग से बचाव के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह आसन रीढ़ और छाती को फैलाने और तनाव को दूर करने में काफी सहायक है। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या रहती है, उनके लिए ब्रिज पोज का अभ्यास करना विशेष लाभदायक हो सकता है। 

चेयर पोज

चेयर पोज का अभ्यास करना डायाफ्राम और हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक माना जाता है। पैरों, कमर और ग्लूट्स जैसी मांसपेशियों के लिए भी इस योग को लाभदायक माना जाता है। हृदय रोग के जोखिम से बचे रहने के लिए चेयर पोज का नियमित अभ्यास करना लाभदायक हो सकता है।

धनुरासन योग का अभ्यास

धनुरासन योग, हृदय की मांसपेशियों को खोलने के साथ हृदय को मजबूत करने में सहायक मानी जाती है। रक्तचाप को नियंत्रित रखने के साथ हृदय रोग के अन्य कारकों भी कम करने के लिए नियमित रूप से इस योग के अभ्यास की सलाह दी जाती है।