सिर्फ हिन्दुस्तान बसता है

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

जहाँ तक यूपी या बिहार का सिवान बसता है।

वहाँ तक अंगुलियों में दान और निर्मान बसता है।

हमें भैया, बिहारी, देशवाली बोलने वालों,

हमारे दिल में हर पल सिर्फ हिन्दुस्तान बसता है।

इसी खित्ते में रामायण यहीं पर वेद और गीता,

यहीं गुरुग्रन्थ बसता है यहीं कुरआन बसता है।

ये गंगा और यमुना का इलाका सरस्वती का घर,

                                     यहाँ पर देवता के रूप में मेहमान बसता है।

हुई सधवा अहिन्सा बापू की जिससे बयालीस में,

ये गाज़ीपुर शहीदों का यहां बलिदान बसता है।

जिससे टकरा के हुआ चूर था पेटैन्ट टैंक भी,

यहाँ हमीद के घर शौर्य का सम्मान बसता है।

ये काशी  रामनगर घर बहादुर शास्त्री  का है,

इसी माटी में पाकिस्तान का अपमान बसता है।

                             यहीं जेपी का बलिया छपरा है बापू का चम्पारण,

विनय सत्याग्रह का इस धरा पर मान बसता है।

जिसे बतला के भारतरत्न, इतराता सकल भारत,

यहीं राजेन्द्र बाबू का जिला सीवान बसता है।

हमारी ही सदारत में वो उतरा इस धरा पर है,

वो पावन ग्रन्थ जिसमें स्वयं संविधान बसता है।
ये आरा है यहाँ जगदीशपुर में आ कभी सुन लो,

यहाँ बाबू कुवँर सिंह वीर का अभिमान बसता है।

यहीं काशी, यहीं मथुरा, यहीं पावन अयोध्या है,

यहाँ के पत्थरों में आके खुद भगवान बसता है।

ये आज़मगढ़, इलाहाबाद, गोरखपुर बताता है,

हमारे घाटों पर साहित्य का उन्वान बसता है।

कभी झांसी, कभी बिठूर के लोगों से भी पूछो,

यहाँ हर ईंट में आजादी का तूफान बसता है।

                                लिखेगा जो इबारत कल को एक समृद्ध भारत की,

इसी खित्ते में वो मज़दूर और किसान बसता है।

पढ़ो इतिहास आजादी का या सीमा की रक्षा का,

हमारी हर गली में त्याग, तप, ईमान बसता है।

कसम नागार्जुन, कैफ़ी, फणीश्वर, अदम, धूमिल की,

यहाँ कमजोर सिर पर पांव में सुल्तान बसता है।

हिकारत की नज़र से हमको अक्सर देखने वालो,

हमारे दिल चाँद छूने का अरमान बसता है।

जो चाहो हर तरफ समृद्धि तो सम्मान दो हमको,

हमारी उँगलियों में जगत का उत्थान बसता है।

ये कस्बा दिल का है दिलदार नगर नाम है इसका,

यहीं निरहु का पुरा में मिरा अरमान बसता है।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव 

सम्पादक

राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर - सन्सद में दो टूक

लोकबन्धु राजनारायण - विचार पथ एक