" अरसे से बीमार पड़ोसी, अच्छा भी हो सकता है" को खूब मिली वाहवाही

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

- प्रमुख समाजसेवी व राजनीति शास्त्र के विद्वान डाक्टर सानन्द कुमार सिंह ने कहा - पिता की स्मृति में वृक्षारोपण और कविसम्मेलन - मुशायरा एक नई परम्परा

- विधायक जंगीपुर डाक्टर वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा - कविता इस देश की आत्मा

- वितरित किए गए एक सैकड़ा लोगों को कम्बल

चौकड़ी, चौरा (गाज़ीपुर )। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया में राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डाक्टर सानन्द कुमार सिंह ने कहा है कि श्री जगराम यादव की पुण्यतिथि पर आयोजित इस वर्ष कवि सम्मेलन मुशायरा, पूर्व में वृक्षारोपण केवल श्रद्धांजलि सभा नहीं है, एक नई परम्परा है, एक नई दिशा है जिसे अपनाकर समाज को नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि  पिछले साल इसी अवसर पर यहाँ वृक्षारोपण हुआ था, आज उसी स्थल पर  कविसम्मेलन और मुशायरा हो रहा है। इस नई परम्परा की जितनी भी तारीफ की जाए कम है।

सोमवार को चौकड़ी, चौरा, गाज़ीपुर में आयोजित श्री जगराम यादव स्मृति कवि सम्मेलन मुशायरा में बतौर मुख्यअतिथि श्री जगराम यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डाक्टर सानन्द कुमार सिंह ने कहा कि कविता   वैदिक काल से हमारे गौरव मयी इतिहास की साक्षी है। यह प्रेरणा परम्परा ज़िन्दा रही तो हमारे वर्तमान की भी गवाह रहेगी।

कार्यक्रम में विशेष मुख्यअतिथि के रूप में उपस्थित जंगीपुर के विधायक डाक्टर वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि कविता इस देश की आत्मा है। कविता मर गई तो इस देश की आत्मा मर जाएगी। इसलिए हम सभी लोगों का दायित्व की कविता को ज़िन्दा रख्खें।

इस अवसर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डाक्टर संतोष सिंह यादव, डाक्टर दिलीप कुमार गौतम, डाक्टर एम खालिद, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमेश यादव ने कविसम्मेलन मुशायरा में आए लोगों से अपील की कि वह इस नई परम्परा को अपनाएं और अपना, अपनीपत्नी, अपने बच्चे का साल गिरह मनाने के साथ माता पिता की स्मृति में इस तरह का कार्यक्रम करें और कराएं।

कविसम्मेलन की अध्यक्षता जनकवि धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव और सन्चालन श्री गौरीशंकर पाण्डे सरस ने किया।

इस अवसर पर सर्वश्री श्रीमती रंजना राय, विजय कुमार मधुरेश, दिनेश चन्द शर्मा, शंकर यादव निर्भय, विनय विश्वात्मा, पंकज प्रखर और  नागेश सांडिल्य आदि ने अपने काव्य पाठ से जमकर वाहवाही लूटी।

खासतौर से जनकवि धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की गज़ल के एक शेर

"तुमसे मतलब नहीं है कोई, लेकिन तुम भी दुआ करो।

अरसे से बीमार पड़ोसी, अच्छा भी हो सकता है।।" पर लोगों की ओर से खूब वाहवाही मिली।

कविसम्मेलन मुशायरा प्रारम्भ होने से पहले मुख्य अतिथि डाक्टर सानन्द कुमार सिंह ने सभी कवियों एवं शायरों को अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया। कविसम्मेलन एवं मुशायरा के अध्यक्ष जनकवि  एवं वरिष्ठ पत्रकार धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने सभी कवियों, श्रोताओं और आयोजक मण्डल की ओर से विधायक डाक्टर वीरेंद्र कुमार यादव और प्रमुख समाजसेवी व राजनीति शास्त्र के विद्वान डाक्टर सानन्द कुमार सिंह को अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर एक सैकड़ा से अधिक गरीबों को कम्बल प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के संयोजक रमेश यादव ने स्मृति समारोह में आए सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और अगले साल तक के लिए कविसम्मेलन मुशायरा को स्थगित करते हुए बतौर अध्यक्ष जनकवि धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की खिल्ली उड़ाते समय हम लोगों को यह जरूर ध्यान में रखना चाहिए कि आपदा के समय यही राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता काम आते हैं। इसे लेकर उन्होंने एक मुक्तक,

" किसी पल तप के आती है किसी पल गल के आती है।

किरन ले रोशनी आती है लेकिन  ढल के आती है।

उसे जी भर के कोसें पर रहे यादों में सच्चाई,

न आता जब कोई दुख में सियासत चल के आती है।" पढ़ा जिसकी सभी अतिथियों ने जमकर तारीफ की।