हाय महंगाई ! महंगाई महंगाई !! तू कहां से आई!!! तुझे क्यों मौत ना आई - महंगाई डायन खाए जात है

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

गोंदिया - भारत में करीब 50 वर्ष पूर्व 18 अक्टूबर 1974 को 161 मिनट की एक हिंदी फीचर फिल्म रोटी कपड़ा और मकान आई थी जो सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी। जिसे हम भोजन वस्त्र और आवास के रूप में कह सकते हैं। साथियों इस फिल्म का उल्लेख इसलिए करना ज़रूरी है, क्योंकि इसका शीर्षक हिंदी मुहावरे पर आधारित है जो जीवन की सामान्य आवश्यकताओं को संदर्भित करता है जिसे 1967 के आम चुनाव से पहले पूर्व पीएम द्वारा 1960 में के दशक के अंत में लोकप्रिय बनाया था? ऐसा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शोध से पता चला है। इसमें एक गाना उस समय बहुत मशहूर हुआ था- बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई! महंगाई मार गई !! पहले मुट्ठी विच पैसे लेकर थैला भर चक्कर लाते थे! अब थैले में पैसे जाते हैं मुट्ठी में शक्कर आती है!! हाय महंगाई! तू कहां से आई तुझे क्यों मौत ना आई!!! वाह क्या बात है!! साथियों यह पांच दशक पूर्व का गाना उस समय की महंगाई पर आधारित माना जाता है और इसके बोल भी वैसे ही हैं। परंतु आज 2021 में यह बिल्कुल ही हम सभ पर सटीक बैठता है। 2010 में आई फिल्म पिपली लाइव का गाना महंगाई डायन खात जात है, हर राजनीतिक रैलियों में बजने लगा था। 2013 में एक फिल्म आई थी सारे जहां से महंगा, क्या आज ऐसी फिल्म आ सकती है? साथियों खासकर युवाओं को मैं बताना चाहूंगा यह गाना ज़रुर सुने। साथियों बात अगर हम आज नवंबर 2021 के चौथे सप्ताह की महंगाई की करें तो रसोई गैस सिलेंडर, इंधन, पेट्रोल डीजल, दालों, सब्जियों से लेकर हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ी है। देश के अधिकांश शहरों में टमाटर की खुदरा कीमतें 80 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रही हैं, लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार, व्यापक बारिश के कारण कुछ दक्षिणी राज्यों में इसका खुदरा भाव 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। चेन्नई में टमाटर का खुदरा भाव 100 रुपये प्रति किलो, पुडुचेरी में 90 रुपये प्रति किलो, बेंगलुरु में 88 रुपये प्रति किलो और हैदराबाद में 65 रुपये प्रति किलो हो गया है। सरसों तेल, आलू याज, टमाटर, सब्जियां, रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें आम-आदमी के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। हर चीज की कीमत दोगुनी होने से जनजीवन त्रस्त है। कोरोना काल के बाद सभी क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। हर चीज की कीमतें आसमान छू रही हैं, किचन से लेकर सड़क तक कीमतों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। किचन में सब्जी से लेकर दाल और यहां तक खाने की हर चीज की कीमतें बढ़ चुकी हैं। सब्जी और फलों के दाम भी आसमान पर हैं। लेकिन सब पर भारी पड़ रहा है सरसों का तेल। आप सरसों के तेल के जरिए समझिए, कि कैसे किचन का ये जरूरी सामान घी से होड़ लगा रहा है। हर घर के किचन के लिए ज़रूरी सरसों तेल ने आम आदमी के खाने का स्वाद बिगाड़ दिया है। पेट्रोल डीजल की हर दिन बढ़ती कीमत और ऊपर से रसोई गैस की मार सबने मिलकर आम लोगों पर महंगाई का ऐसा जोरदार प्रहार किया है कि मुसीबत और बड़ी हो गई है। रिकॉर्ड महंगाई ने जीना मुहाल कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि महिलाओं को हर दिन रसोई चलाने में मुश्किलें आ रही हैं। इस महंगाई ने खाने का स्वाद हीफीका कर दिया है। मंहगाई की ये रफ्तार हर सीमा पार कर चुकी है। पिछले एक साल में ही खाने के तेल की कीमतों पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। इतिहास भी गवाह है कि असाधारण रूप से महंगाई जब भी बढ़ी है। राजनीतिकउथल-पुथल मची है। साथियों बात अगर हम महंगाई पर नियंत्रण की करें तो ऐसा नहीं है कि सरकारें कोशिश नहीं कर रही है। कोविड काल से लेकर इस पर नज़र बनाए हुए हैं। अभी दो दिन पहले ही, पीआईबी के अनुसार पीएम द्वारा सात जून, 2021 को राष्ट्र के नाम सम्बोधन में लोकहित में की गई घोषणा तथा कोविड-19 के संदर्भ में आर्थिक पहलों के हिस्से के रूप में मंत्रिमंडल ने पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई-चरण पांच) को और चार महीने, यानी दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक विस्तार देने को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) सहित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) [अन्त्योदय अन्न योजना एवं प्राथमिकता प्राप्त घरों] के दायरे में आने वाले सभी लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति, प्रति माह पांच किलो अनाज निःशुल्क प्राप्त होता रहेगा। पीएम ने घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम/डीजल की ऊंची कीमतों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत, भारत सरकार ने 3 नवंबर 2021 को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क  में क्रमशः 5 रुपये और 10 रुपये की कमी की थी। इसके बाद कई राज्य सरकारों द्वारा ईंधन पर लगने वाले मूल्य वर्द्धित कर (वैट) में कमी की गई। सरकार पर भारी वित्तीय बोझ के बावजूद, नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए ये कठिन कदम उठाए गए। भारत अपने सामरिक पेट्रोलियम भंडार से 50 लाख (5 मिलियन) बैरल कच्चा तेल जारी करने पर सहमत हुआ है। तेल को जारी करने की यह प्रक्रिया समानांतर रूप से और संयुक्त राज्य अमेरिका, चीनी लोक गणराज्य, जापान और कोरिया गणराज्य सहित अन्य प्रमुख वैश्विक ऊर्जा उपभोक्ताओं के परामर्श से होगी। साथियों बात अगर हम 2022 में पांच राज्यों के चुनाव की करें तो, 2019 में सीएसडीएस की ओर से किए गए चुनाव के बाद के सर्वेक्षण में महज चार फीसदी लोगों ने मूल्य वृद्धि को मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा माना। जबकि 1980 के चुनावों में 25 फीसदी से अधिक लोगों के लिए महंगाई एक मुद्दा था। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि महंगाई वास्तव में बढ़ गई है। और जनता के मुख में हाय महंगाई! महंगाई महंगाई!!तू कहां से आई!! तुझे क्यों मौत ना आई!! महंगाई डायन खाए जात है!! गूंज रहा है!! क्योंकि कोरोना काल के बाद देश में आर्थिक मंदी व सभी क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई ने आम जनता के सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। 

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र