सवेरा सूरज से आया

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

आसमान में बिजली कड़की

आसमान का दर्द समझ आया l

जिस धरती से खाते हैँ रोटी

कभी दर्द क्यों न समझ आया l

देश है तो धर्म है धर्म है तो देश

किसके बिना हमें जीना आया l

तोड़ दें  संकरी जंजीरे दिमांगों की 

मुर्गे से नहीं सवेरा सूरज से आया l

पूनम पाठक बदायूँ 

इस्लाम नगर उत्तर प्रदेश