"इश्क़ जिनकी पूंजी..."

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क     


इश्क़ जिनकी पूंजी उन्हीं की कहानी हूँ मैं ! 

शून्य  ज़िन्दगी की  नगन्य  कहानी  हूँ  मैं !! 


                      इश्क़ जिनकी पूंजी .......!

                      शून्य ज़िन्दगी की .........!!


अ - सीम  अथाह  असहनिय  पीड़ा - मंथन ,

खामोश - शांत  गति - रहित  पानी  हूँ  मैं...! 


                       इश्क़ जिनकी पूंजी .........!

                       शून्य ज़िन्दगी की ...........!!


एक  कंकड  फेंककर  देखो तो शांत सागर में ,

कड़ी  दर  कड़ी  बनती  हुई  निशानी  हूँ  मैं...! 


                        इश्क़ जिनकी पूंजी ...........!

                        शून्य ज़िन्दगी की .............!!


झांककर देखो ज़रा दिल में रेखान्कित मिलेगी ,

चित्रांकित भी मिलेगी वो कमप्यूटर रानी हूँ मैं  ! 


                          इश्क़ जिनकी पूंजी .........!

                          शून्य ज़िन्दगी की ...........!!


धड़कनों के साथ मिल चुकी है तुम्हारी आवाज ,

जान सको तो जान लो  जानी  पहचानी हूँ  मैं..! 


इश्क़ जिनकी पूंजी उन्ही का कहानी हूँ मैं ! 

शून्य  ज़िन्दगी  की  नगन्य  कहानी  हूँ  मैं  !!!!!!


स्वरचित एवं मौलिक

मनोज शाह 'मानस'