भईया से भाईदूज पर मुख्यमंत्री की कुर्सी का तोहफा लेंगी डिंपल यादव- अतुल मलिकराम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

उत्तर प्रदेश, विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्रदेशभर में सियासी पारा गर्म है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एक बार फिर चुनाव ना लड़ने और आरएलडी के साथ गठबंधन की घोषणा ने कई अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि मैंने इस बात की आशंका पहले ही जताई थी और पूर्व मुख्यमंत्री से इस बार अपनी कुर्सी की दावेदारी भी कन्नौज से दो बार सांसद रही अपनी पत्नी डिंपल यादव को सौंपने की मांग भी लगातार दोहराई है। पोलिटिकल एनालिस्ट अतुल मलिकराम ने यह राय सोशल मीडिया प्लेटफार्म कू के जरिये पोस्ट की बेशक डिंपल भी इस पद को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं होंगी लेकिन उनके पास लगभग पूरा कार्यकाल संभालने वाले मुख्यमंत्री का सीधा अनुभव रहेगा। जहां अखिलेश भैया के रूप में प्रदेशभर के युवाओं को एकजुट करने में कुछ हद तक कामयाब रहे हैं उसे युवाओं के जनसैलाब में तब्दील करने की ताकत डिंपल बखूबी रखती हैं। युवाओं के साथ महिला मोर्चे पर भी डिंपल कमाल का जादू बिखेर सकती हैं। हालांकि इन सबके लिए उनका मैदान-ए-जंग में सक्रिय रुप से उतरना तथा प्रदेश की जनता को मुख्यमंत्री के रूप में अपनी काबिलियत, सक्रियता और समझदारी का परिचय देना होगा।

यदि हम उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिलाओं के वर्चस्व की बात करें तो प्रदेश में अब तक की सबसे अधिक बार मुख्यमंत्री रहीं, मायावती से ऊपर कोई नाम नजर नहीं आता लेकिन मायावती एक दौर की दिग्गज राजनेता रही हैं और मौजूदा दौर पूरी तरीके से उनकी समझ और सहूलियत के खिलाफ जाता है। दूसरी ओर अपनी पार्टी के अस्तित्व को जीवित रखने की लड़ाई लड़ रही प्रियंका गांधी वाड्रा प्रदेश में काफी सक्रिय हैं लेकिन उनकी सक्रियता बरसाती मेंढको की तरीके कही जा सकती है जो सिर्फ चुनावी माहौल में ही नजर आती हैं। ऐसे में तीसरा सबसे बड़ा नाम सिर्फ डिंपल यादव ही है जिन्हें पूरी ताकत के साथ यूपी वासी स्वीकार सकते हैं और फिर मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनका बहन भाई वाला रिश्ता भी कई मायनों को मुकाम तक पहुंचाता है।

अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव पौड़ी गढ़वाल के किलबउखाल गांव से ताल्लुक रखता है। यह गांव योगी आदित्यनाथ के पंचूर गांव से 56 किमी की दूरी पर है। फिर डिंपल और योगी दोनों ही क्षत्रीय परिवार से संबंध रखते हैं, इस तरह की अफवाह भी खूब उड़ी जिनमें कोई सच्चाई तो नहीं थी फिर भी एक ही जन्म प्रदेश से होने के नाते एनसीआरसी भाई बहनों को खूब वाहवाही मिली तो क्यों ना डिंपल को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर भैया योगी आदित्यनाथ से तोहफे में पूरा प्रदेश ले लिया जाए। इस बारे में अखिलेश-डिंपल और समाजवादी पार्टी गंभीरता से चर्चा करें तो बेहतर।