एक दीया समर्पित

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


एक दीया उस देश को अर्पित जन्म लिया जिस पावन धाम।

मन मे पाले समृद्धि की आसा अपना भारत बने महान।।


एक दीया उस वीर पुरुष को जिसने तैयार किया इतिहास।

उस लौ के प्रकाश से प्रकाशित हो रहा अपना राह।।


एक दीया अर्पित करता हुँ भारत माता के लाल को ।

सीमा पर अडिग बैठा है जो अपनी सीना तान के ।।


एक दीया उस किसान को अर्पित जो स्वहा कर रहा अपने आप को।

खेतों में तो अनाज लह लहाती पर पेट आग से जला रहा आप को।।


एक दीया उस माँ को अर्पित जो झेल रही पारिवारिक तिरस्कार।

बेटा उनके धन्ना बनते वो बैठी बृद्धा आश्रम के द्वार ।।


एक दीया उस योद्घा को अर्पित जीसने डाल दिया था जान।

जिनके अथक परिश्रम से फिर छुडा पाए हम कॅरोना से जान।।


एक दीया उनको भी अर्पित जिनका छुटा अपनों से साथ।

अश्रु के दो बूंद समर्पित जिनका छूटा अपनों से साथ।।


एक दीया आब राष्ट्र समर्पि समर्पण का बस लिए भाव।

राष्ट्र रक्षा का मकसद अपना होता रहे हरदम साकार।


श्री कमलेश झा फरीदाबाद