पारदर्शी सामुदायिक रसोई योजना ढांचे पर मंथन जारी - महिलाओं, बच्चों, बेघरों, झुग्गी झोपड़ी वालों, औद्योगिक और निर्माण स्थल पर काम करने वालों के लिए अनूठी योजना

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

पारदर्शी सामुदायिक रसोई योजना - सरल पारदर्शी और पात्र लोगों के हित में  सामूहिक संकल्प एक सराहनीय कदम - एड किशन भावनानी

गोंदिया - भारत विश्व प्रसिद्ध गांव प्रधान, कृषि प्रधान देश है फ़िर भी भारत की बुद्धिमता और श्रम कुशलता का लोहा वैश्विक रूप से प्रसिद्ध है। साथियों मेरा मानना है कि विश्व में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहां हमारे भारतीय मूल के भाई बहन निवास ना करते हो, क्योंकि विदेशों में भी भारतीय बुद्धिमता और और श्रम कौशलता का अपना जौहर दिखा रहे हैं और सबसे गर्व वाली बात यह है कि वैश्विक रूप से भारतीय बौद्धिक और श्रम कौशल व्यक्ति की मांग सबसे अधिक है। याने मेरा मानना है कि वैश्विक स्तर पर भारतीयों को सबसे प्राथमिकता का सम्मान मिलता है। भारत में भी मानवीय बुद्धि कौशलता और श्रम का उपयोग  हर क्षेत्र में इसका भरपूर हो रहा है। साथियों बात अगर हम श्रम कौशलता और उनके लिए विभिन्न शासकीय योजना महिला श्रम, उनके बच्चों की योजना, देखभाल की करें तो शासन किसी भी पार्टी का हो परंतु श्रीमिकों, महिलाओं, बच्चों, बेघरों, झुग्गी झोपड़ी वालों के लिए पूरे सम्मान के साथ शासकीय योजनाएं संचालित की जाती है। साथियों आध्यात्मिकता संपन्न देश भारत में कहावत है कि ईश्वर अल्लाह किसी को भूखा नहीं सुलाता। इसी क्रम में हमने देखे कि कोविड-19 महामारी के भारी संकट की स्थिति में सरकार ने 80 करोड़ लोगों के लिए 5 किलो अनाज 1 किलो दाल या चना की योज़ना शुरू की जिसकी समय अवधि बढ़ाकर अब 31 मार्च 2022 तक कर दी गई है इसी क्रम में सरकार द्वारा एक अन्य, पारदर्शी सामुदायिक रसोई योजना ढांचे पर मंथन जारी है जिसमें, महिलाओं, बच्चों, झुग्गी झोपड़ी वालों और औद्योगिक तथा निर्माण स्थल पर काम करने वालों के लिए एक अनूठी योजना पर मंथन जारी है जिसमें वही बात कि, कोई भूखा नहीं सोता के लक्ष्य को महसूस करने के मैं मदद मिलेगी। साथियों बात अगर हम दिनांक 25 नवंबर 2021 की करें तो पीआईबी के अनुसार केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री द्वारा अखिल भारतीय खाद्य मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने सचिवों के समूह के गठन की घोषणा करते हुए आज पुष्टि की कि सामुदायिक रसोई योजना तैयार करने की आवश्यकता है- जो सरल, पारदर्शी और लोगों के लाभ के लिए हो। उन्होंने कहा, हमें देश के गरीबों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए और बच्चों के लिए उचित पोषण तय करने के लिए सफल और पारदर्शी खाद्य कार्यक्रम चलाने का सामूहिक संकल्प सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प होना चाहिए कि गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों सहित बेघरों, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों, औद्योगिक और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले कमजोर लोगों तक आवश्यकता के आधार पर पहुंचे। महामारी के दौरान पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) वरदान साबित हुई है। उन्होंने बताया कि 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को हर घर अन्‍न सुनिश्चित करते हुए मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है। यह लोगों को आशा प्रदान करने के लिए पीएम के विशाल दिल की संवेदनशीलता को दर्शाता है। रूपरेखा प्रस्ताव पर विचार करने के लिए अधिकारी स्तर की अगली बैठक 29 नवंबर को होगी। आदर्श सामुदायिक रसोई योजना के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि सामुदायिक रसोई समुदाय की, समुदाय द्वारा संचालित और समुदाय के कल्याण के लिए होगी। उन्होंने आग्रह किया कि इसे गुणवत्ता, स्वच्छता, विश्वसनीयता और सेवा की भावना के 4 स्तंभों पर बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे हमें इस लक्ष्य को महसूस करने में मदद मिलेगी कि कोई भी भूखा नहीं सोता है। मार्च 2022 तक पीएमजीकेएवाई के विस्तार पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि सरकार चरण I-V, से पीएमजीकेएवाई में 2.6 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी, जो चरण 4 के पूरा होने के बाद 1 दिसंबर, 2021 से शुरू होगा। आज की बैठक के महत्वपूर्ण एजेंडे का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि माननीय उच्‍चतम न्यायालय के निर्देश के सम्‍बन्‍ध में आदर्श सामुदायिक रसोई योजना और विभिन्न राज्यों (34 सक्षमराज्यों/ संघ शासित प्रदेशों) में कार्यान्वयन की स्थिति के संबंध में एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ओएनओआरसी), राशन कार्डों की आधार सीडिंग और बायोमेट्रिक रूप से प्रमाणित एफपीएस लेनदेन पर चर्चा की जाएगी। आगे कहा, उत्पादकता कभी दुर्घटना नहीं होती। यह हमेशा उत्कृष्टता, बुद्धिमान योजना और केंद्रित प्रयास के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत आजादी के अमृत महोत्सव के 75 सप्ताह मना रहा है और महोत्सव के इन शेष हफ्तों में, आइए भारत की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उसे आत्मनिर्भर बनानेपर चर्चा करें। खाद्य सचिवों के समूह में 8 राज्यों केरल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के खाद्य सचिव शामिल हैं। मध्य प्रदेश के खाद्य सचिव समूह का नेतृत्व करेंगे। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि पारदर्शी सामुदायिक रसोई योजना जो गरीबों, महिलाओं, बच्चों, बेघरों, झुग्गी झोपड़ी वालों, औद्योगिक और निर्माण स्तर पर काम करने वालों के लिए अनूठी योजना पर मंथन किया जा रहा है तारीफ ए काबिल हैं जिस पर सकारात्मक निर्णय लेकर रणनीतिक रोडमैप बनाकर धरातल पर शीघ्र कार्यान्वयन करने की ज़रूरत है। 

-संकलनकर्ता- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र