विधिक माप विज्ञान (पैक किए गए उत्पाद) नियम 2011 में संशोधन - उपभोक्ता सोच समझकर खरीदी फैसला लेने में सक्षम होंगे - संशोधन एक अप्रैल 2022 से लागू होंगे

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

भारत में पैकिंग उत्पादों और सामग्री पैकिंग में प्रचलित सम मात्रा में वजन, ग्राम की अनिवार्य सुनिश्चितता का संशोधन करना तात्कालिक ज़रूरी - एड किशन भावनानी

गोंदिया - भारत विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। जहां वैश्विक रूप से यह चाहत रहती है कि उस देश का सामान भारतीय बाजारों में उतारा जाए खासकर विस्तार वादी देश की लंबे अरसे से भारतीय बाजारों पर पकड़ रखने की ख्वाहिश है, परंतु जब से हमारे देश में 20 सैनिकों की गलवान घाटी में शहादत हुई है, तब से लेकर हम भारतीयों में एक अपना आत्मनिर्भर भारत बनाने का जुनून उमड़ पड़ा है और शासकीय स्तर पर भी हमने देखे कि सैकड़ों ऐपो को बंद किया गया है। कई मंत्रालयों ने भी विस्तार वादी मुल्क से अपने व्यापारिक सौदों को या तो रद्द किया या मात्रा घटाई या फ़िर आगे कोई खरीदी ना करने की घोषणा की। साथियों बात अगर हम भारतीय नागरिकों की करें तो हमने भी खिलौने और दीपावली 2021 पर देशी वस्तुओं की खरीदारी कर विस्तारवादी देश को हज़ारों करोड़ों लाख के टर्नओवर को कम किए। साथियों बात अगर हम भारतीय बाजारों और पैकिंग उत्पादों की करें तो आज वर्तमान युग में सुपर बाजार, महासेल बिगबाजार, मेगमार्ट इत्यादि इतने बढ़ गए हैं, जिसके कारण पैकिंग सामानों का प्रचलन काफ़ी बढ़ गया है। साथियों बात अगर हम विधिक माप विज्ञान (पैक किए गए उत्पाद) नियम 2011 में संशोधन की करें तो उसे संशोधित कर नियम 2021 किया गया है। भारत के गजट में दिनांक 3 मार्च 2021 को तीन पृष्ठों की अधिसूचना जारी की गई थी और पीआईबी के दिनांक 8 नवंबर 2021 की विज्ञप्ति के अनुसार, एमआरपी की घोषणाके प्रावधानों को सभी करों सहित भारतीय मुद्रा में एमआरपी की अनिवार्य घोषणा करने के लिए चित्रण को हटाकर और प्रदान करके सरल बनाया गया है। इससे निर्माता/पैकर/आयातक को पहले से पैक की गई वस्तुओं पर एमआरपी को सरल तरीके से घोषित करने की मंजूरी दी गयी है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विधिक माप विज्ञान (पैक किए गए उत्पाद), नियम 2011 का नियम पांच हटा दिया है, जिसमें विभिन्न प्रकार की वस्तुओं के पैक आकार को निर्धारित करने वाली अनुसूची 2 को परिभाषित किया गया था। पहले से पैक की गई वस्तुओं पर इकाई बिक्री मूल्य को इंगित करने केलिए एक नया प्रावधान पेश किया गया है, जिससे खरीद के समय वस्तुओं की कीमतों की तुलना करना आसान हो जाएगा। अनुपालन से जुड़े बोझ को कम करने और उपभोक्ताओं के लिए पहले से पैक वस्तुओं पर तारीख की घोषणा की अस्पष्टता को दूर करने के लिए, अब उस महीनेऔर वर्ष के लिए घोषणा की आवश्यकता है जिसमें पहले से पैक की गई वस्तुओं के लिए वस्तु का निर्माण किया जाता है। इससे पहले, जिस महीने और साल में उत्पाद का निर्माण या प्री-पैक या आयात किया जाता है, उसका पैकेज में उल्लेख किया जाना आवश्यक था। इस अस्पष्टता को दूर करने के लिए इस संबंध में उद्योग और संघों से अभ्यावेदन प्राप्त हुआ। साथियों बात अगर हम वर्तमान ज़माने की करें तो अब ज़माना ऐसा आ गया है कि पैकिंग वस्तुओं का, जिसमें उपभोक्ताओं का किस तरह नुकसान होता है शायद इसपर हम उपभोक्ताओं और शासन का भी ध्यान नहीं गया होगा जिसका खुलासा मैं करने जा रहा हूं और इस आर्टिकल के माध्यम से यदि उचित समझे तो, सरकारों को तात्कालिक संशोधन करने की ज़रूरत है। साथियों बात अगर हम पैकिंग किए गए उत्पादों की करें तो उस पर उसका वजन ग्राम में और एमआरपी रुपए में लिखी होती है, लेकिन वर्तमान महंगाई के दौर में पेट्रोल डीजल टैक्सेस या अन्य कारणों से यदि उत्पाद की कीमत में वृद्धि होती है तो हम लंबे समय से देख रहे हैं कि उस पैकेट की कीमत नहीं बढ़ाई जाती जबकि उसका वज़न कम कर दिया जाता है वह भी इस तरह कि एक आम उपभोक्ता को उसका अंदाज ही नहीं लग पाताहालांकि पैकेट के ऊपर लिखा रहता है पर हमें देखने का ध्यान ही नहीं रहता ?? मसलन 100 ग्राम वाले पाउच को 80, 70, 65 और 200 ग्राम वाले को 180,165 500 ग्राम, हजार ग्राम वाले को 470, 440, 880 720 ग्राम कर दिया जाता है और आम उपभोक्ता को उसका वही ओरिजिनल वजन ध्यान में रहता है क्योंकि यह प्रचलित भी है, इसलिए शासन को तात्कालिक पैकिंग सामग्री को 50, 100, 200, 500, 1000, ग्राम पूरा वज़न सम मात्रा में निश्चित करने का संशोधन तात्कालिक करना चाहिए। साथियों मैं खुद एक पाव चायपति का पैकेट लेता था, अब वह 230 ग्राम का कबसे हो गया है मुझे ही नहीं मालूम, मैं आज तक 250 ग्राम समझ कर ही लेता था इसलिए शासन को विधिक माप विज्ञान (पैक किए गए उत्पाद) नियम 2021 में तात्कालिक संशोधन कर पैकिंग सामग्री को प्रचलित सम मात्रा में घोषित वज़न कम नहीं करने या इसकी सूचना पैकिंग के ऊपर बोल्ड अक्षरों में प्राथमिक रूप से देने का संशोधन करना अत्यंत तात्कालिक पारित करना ज़रूरी है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विधिक माप विज्ञान (पैक किए गए उत्पाद) नियम 2011 में संशोधन सराहनीय है, परंतु भारत में पैकिंग उत्पादों और सामग्री पैकिंग में प्रचलित सम मात्रा में वजन ग्राम की अनिवार्य सुनिश्चितता का संशोधन भी इस 2021 के नियम ने करना तात्कालिक ज़रूरी है। 

संकलनकर्ता लेखक कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र