कोई दवा ही नहीं,,,,,,

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

दर्द का मेरे उसको 

कोई पता ही नहीं,

दर्दे दिल आँखों से

अभी बहा ही नहीं,

तन्हाईयों में कभी मैं 

तन्हा  ही नहीं रहा,

तेरे तस्सवुर से मैं

अलग रहा ही नहीं,

ज़िंदगी दर्द  है, तो 

बस इसको सहना है,

मौत के सिवा इसकी

कोई दवा ही नहीं,

दर्द की शिद्दत तो

इश्क़ के राही समझें,

क्या पता  उसको

इश्क़ किया ही नहीं,

हुस्न जमाल उफ़ तेरा 

घायल ही कर गया,

तुम कहते हो कि मेरी 

कोई ख़ता ही नहीं,

वाल्दैन ख़फ़ा भी हों 

बददुआ नहीं लगती,

उनकी दुआ से बढ़कर

मुश्ताक़ दुआ ही नहीं,


डॉ. मुश्ताक़ अहमद

शाह सहज़

हरदा मध्यप्रदेश,,,,