काश और आस

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


काश और आस 

ये जिंदगी के पहलू

काश सफल होता तो

आस फिर एक काश की

आस कर ही लेते हैं।।


यही काश और आस के लिए

इंसान पैसा ही सब कुछ है

आज के युग में यही कहते हैं।। 


आस और काश के सामंजस्य

में ही बंध कर रह गया है इंसा

सोचो, समझो आज इसी पैसों

को ही सब दुनियादारी कहते हैं।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र








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