रेत पर घर बनाना नही चाहिए

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


रेत से घर बनाना नहीं चाहिए।

ख्वाब को पर लगाना नहीं चाहिए।

आसमां से गिरोगे मिलेगी जमीं,

इस सच को झुठलाना नहीं चाहिए।

ये ग्रह ये नक्षत्र सब गतिमान है,

बैठकर दिन गँवाना नहीं चाहिए।

आलोकित है जिससे जग ये तमाम,

उसे दीपक दिखाना नहीं चाहिए।

लोग इल्जाम देंगे तुझको इनाम,

रंजो-गम को जताना नहीं चाहिए।

हक गरीबों का लेकर बने अमीर,

मुफलिसों को सताना नहीं चाहिए।

ख़ाक में ही मिलेंगे एक दिन सभी,

मौत पर हक जमाना नहीं चाहिए।

जो तुझमें हुनर है वो ला सामने,

"प्रतिभा " को छुपाना नहीं चाहिए।


प्रतिभा कुमारी

त्रिवेणीगंज

सुपौल, बिहार।