अबके क्रांति गुलाबी हो जाए

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  


बंदिशें,धमकियां,फिकरे,फब्तियां,

सहती, सुनती रही हो सदियों से,

अबके कार्रवाई जवाबी हो जाए,

तोड़ दे घमंड अत्याचारी का

अबके क्रांति 'गुलाबी' हो जाए।


दुराचार, हत्या,गुलामी, बदनामी,

तेरे हिस्से आई है सदियों से,

अबके पलटवार जवाबी हो जाए,

गला दे हड्डियों को हत्यारे की

अबके क्रांति 'तेजाबी' हो जाए।


इंतजार ना कर किसी मसीहा का,

अपने आप में ही हिम्मत जगा,

अबके प्रहार जवाबी हो जाए,

गलत करने का सोचे भी न कोई

अबके क्रांति 'इंकलाबी' हो जाए


                         जितेंद्र 'कबीर'