बिक गया दिल मेरा


युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

प्यार तुझको करती हूंँ मैं मजबूर क्यों करूंँ

चाहत मेरी एक तरफा मैं इजहार क्यों करूंँ।

तेरी निगाहों के इशारे कह रहे कुछ ओर हैं,

हर समय यादे तेरी परेशान करे क्या करूंँ।

तेरी निगाहों की शोखी प्यारी सी मुस्कान तेरी,

दिल चुराने को मेरा मजबूरी सी है क्या करूंँ।

निगाहों से तुमने तो दिल चुरा लिया है मेरा

हंसी बातें तेरी दिल में बसी तो क्या करूंँ।

सोच रही है यह 'मधु' ठगी सी है बस खड़ी

हर बात मुझे सोचने पर मजबूर करे क्या करूंँ।

इश्क खुदा की कसम बस दिल में बसा है मेरे,

जज्बा तेरे प्यार का परेशान करे तो क्या करूँ।

प्यार मेरा हर समय मजबूर सा है क्यों लगे,

दिल मेरा खुद के हाथों बिक गया तो क्या करूँ।।

                    रचनाकार ✍️

                    मधु अरोरा