मिटाते चलो

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

जैसे ही नवरात्रि का

त्यौहार आता है

आपको इंतजार होता

दशहरा आने वाला है

वही दशहरा आता है

जो राम और रावण की

याद दिलाता है

राम सर्वशक्तिमान

रावण अहंकारी और जिद्दी

राम ने कदम कदम पर सिखाया

मानवता परोपकार और दया

रावण तो जिद्दी ही था

उसने अहंकार को नहीं मिटाया

आप रावण हर साल जलाते हैं

आप रावण को मिटाना चाहते हैं

लेकिन कागज के बने हुए

पुतले क्या बोलेंगे

वह तो लौट कर

कोई जवाब नहीं देंगे

यदि आज किसी जीवित

रावण को जलाया जाए

तो शायद वह कुछ शिक्षा दे पाए

रावण जिन लोगों में बसा हुआ है

वही वातावरण में मिला हुआ है

लंका का शक्तिशाली राजा

रावण तो मारा गया

राम के द्वारा उसका

कल्याण कर दिया गया

आज जगह जगह होता है रावण

जो मरता नहीं है कभी भी रावण

रावण बुराइयों का रूप ही तो है

जो लोगों में विद्यमान रहता है

अगर पुतला बोल सकता

तो शायद सबको बताता

कि तुम अपने अंदर से

रावण को मिटा दो

मैं तो कबका मर चुका हूं

कितना मारोगे तुम मुझे

खुश तो रहोगे तुम जब अ

पने अंदर से रावण मारोगे

मैं तो कागज का पुतला हूं

न हंसता हूं न रोता हूं

नामुझ में कोई शक्ति है

न मैं कोई भक्ति करता हूं

चाहे तुम इस परंपरा को

हमेशा बनाए रखो लेकिन

अपने अंदर जो रावण हो

उसको मिटाते चलो

रितु शर्मा

दिल्ली