जिला जज, डीएम व एसएसपी ने कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

सहारनपुर। जिला जज, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहारनपुर व अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण द्वारा पुलिस बल के साथ कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। इस दौरान कचहरी सुरक्षा में लगे समस्त सुरक्षा उपकरणों, सीसीटीवी कैमरे व कन्ट्रोल रुम का बारीकी से अवलोकन किया गया तथा कचहरी परिसर में आने जाने वाले व्यक्तियों से पूछताछ की गई तथा कचहरी परिसर में मौजूद व्यक्तियों से अपील की गई कि कोई संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो तुरन्त पुलिस को सूचना दे और कानून सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने के लिये पुलिस का सहयोग करे। इसके साथ-साथ कचहरी परिसर में डियूटीरत अधिकारियों/कर्मचारीगणों को संदिग्ध व्यक्तियों की चौंकिंग/पूछताछ करने के साथ-साथ सर्तकता के साथ डियूटी करने एवं कचहरी की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ बनाने हेतु कार्य योजना तैयार कर आवश्यक कार्यवाही करने/कराने के लिये सम्बन्धित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

यूपी बार काउंसलिंग के आहवान पर सहारनपुर समेह पूरे प्रदेश में आज अधिवक्ताओं ने हड़ताल रख अपनी सुरक्षा की मांग पुरजोर तरीके से उठायी। तीन दिन पूर्व शाहजहांपुर कोर्ट परिसर में अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या के विरोध में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों से विरत रहते हुए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किये जाने की मांग के साथ ही गोली के शिकार बने अधिवक्ता भूपेन्द्र सिंह के परिजनों को 50 लाख की आर्थिक सहायता तथा मृत आश्रित एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दिये जाने की मांग उठायी। इस दौरान सहारनपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभय सैनी, महासचिव राहुल त्यागी, अम्बरीश पुण्डीर उर्फ लाला, अश्वनी शर्मा, अशोक पुण्डीर, नासिर हैदर जैदी, मंजर हुसैन काजमी, अशरफ खान, रविश माहेश्वरी, महेश गुप्ता, रामकुमार, संजय कुमार आर्य, मुताहर हुसैन जैदी समेत काफी संख्या में अधिवक्तागण मौजूद रहे। इससे पूर्व सिविल कोर्ट में पहुंचे जिलाधिकारी अखिलेश सिंह व एसएसपी डा.चनप्पा ने कोर्ट का मुख्य द्वार बंद कराकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तथा बिना मासक पहने परिसर में घूमते लोगों को भी जागरूकता का पाठ पढाया।  

ज्ञातव्य हो कि पिछले दिनों दिल्ली के न्यायालय में हुए शूटआउट के बाद अब शाहजहांपुर न्यायालय में एक अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या उपरान्त अब यहां न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक चौबन्द कर दिया गया है। दिल्ली में घटी वारदात हो या फिर शाहजहांपुर की इन दोनों ही वारदात में एक पहलू समान्तर ही नजर आता है कि पुलिस की भारी मौजूदगी में भी न्यायालय में हथियार कैसे पहुंच जाते हैं ? इसे पुलिस की निष्क्रियता माना जाये या अपराध को अंजाम देने वालों की सक्रियता, इस पर अभी मंथन जारी है। दिल्ली में हुए शूटआउठ के बाद सहारनपुर न्यायालय में भी अतिरिक्त पुलिस फोर्स की तैनाती की गयी और साथ ही पुलिस के आला अधिकारियों ने स्वयं मौके पर पहुंच सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ते रहे, इसमें शिथिलता नजर आने लगी।

 अब शाहजहांपुर में अधिवक्ता की न्यायालय में हत्या के बाद पुलिस एक बार फिर से सतर्क नजर आने लगी है। न्यायालय में पहुंचे संदिग्ध लोगों की तलाशी लेना भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। न्यायालय ख्ुालने का समय प्रातः 10 बजे और बंद होने का समय सांय 5 बजे निर्धारित है, लेकिन यहां लोगों की आवाजाही प्रातः 9 बजे से ही शुरू हो जाती है जो कि देर शाम तक देखी जा सकती है। न्यायालय खुलने और बंद होने के निर्धारित समय तक यहां पुलिस की मुख्य द्वार समेत परिसर के अंदर भी तैनाती होती है जो निर्धारित समय खत्म होने के पश्चात यहां से कूच कर जाते हैं। इसके बाद न्यायालय में कौन आ रहा है और कौन जा रहा हे, इससे इन्हें कोई सरोकार नहीं है, क्योंकि इनकी अपनी ड्यूटी समाप्त हो चुकी होती है। 

शाहजहांपुर में अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या करने वाला आखिर तमंचा लेकर कोर्ट परिसर में कैसे प्रवेश कर गया, ये अभी यक्ष सवाल बना हुआ है। दिल्ली शूटआउट के बाद यहां न्यायालय में प्रवेश के लिए अधिवक्ताओं को परिचय पत्र दिये गये थे, क्योंकि दिल्ली शूटआउट में हत्यारों ने अधिवक्ता का भेष धारण कर ही हथियारों के साथ न्यायालय में प्रवेश कर वारदात को अंजाम दिया था। तो क्या ली जायेगी? इस पर चर्चाओं का बाजार गरम है। चर्चा ये भी है कि शाम 5 बजे ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों के वहां से जाने के बाद कोर्ट परिसर में लोगों का आना-जाना लगा ही रहता है, जिन्हें चैकिंग का भी कोई डर नहीं है। ऐसे में किसी वारदात को अंजाम देने के लिए अपराधी हथियारों को कोर्ट परिसर में कही छिपा भी सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए कोर्ट का समय समाप्त होने पर किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित वारदात को टाला जा सके।