नारी पर छंद

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

(1)

नारी से शोभा बढ़ती है,नारी फर्ज़ निभाती है।

नारी कर्म सदा करती है,नारी द्वार सजाती है।।

सबको कब यह भान मिलेगा,नारी प्रेम बहाती है।

सबको कब यह ज्ञान मिलेगा,नारी पूज्य कहाती है।।

(2)

नारी के सब गुण गाते हैं,पर ना धर्म निभाते हैं।

कुछ कहते हैं पर करते कुछ,लोग सदा भरमाते हैं।।

अब अँधियारा तजना होगा ,उजियारे को लाना है।

नारी की मुस्कान सजेगी,हमको सब कुछ पाना है ।।

(3)

नारी दुर्गा-सी लगती है,नारी ज्ञान कहाती है।

नारी धन की भी देवी है,नारी नित्य सुहाती है।।

नारी की नित ही जय बोलो,यश गुंजित हो जाएगा।

चहक उठेगी सारी दुनिया,जग भी खुशियाँ पाएगा।।

(4)

दुनिया तो कपटी लगती है,नीति समझ ना आती है।

बातें अच्छी करती हैं पर,करनी में गिर जाती है।।

नारी को अब बढ़ना होगा,दौर बदल ही जाएगा।

नारी का अपमान रुकेगा,मौसम मंगल गाएगा।।

(5)

नारी नर की जीवन साथी,बात समझ में आती है।

पर नर क्यों अनुदार हो गया,उसे क्रूरता भाती है।।

नारी तब ही सुखमय होगी,जब नर ख़ुद को बाँचेगा।

नारी पर जो ज़ुल्म किए हैं,ख़ुद की करनी जाँचेगा।।

  

             -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे