सरताज हो तुम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


माथे की बिन्दियां की,

लाज हो तुम।

खनकती चूड़ियों की,

आवाज हो तुम।

तुमसे है जीवन,

तुम प्राण पिया।

दिल मे समाये वो,

राज हो तुम।

चांद बिखेरे चान्दनी,

जीवन तुम महकाये रहना।

परिवार की इस बगिया को,

प्यार से सजाये रहना।

श्रृंगार मे जो रस भरे वो,

अन्दाज हो तुम।

दिल मे समाये वो,

राज हो तुम।

ईश्वर दे दीर्घायु तुम्हे,

यही करती हूँ कामना।

तन्हा न होउ कभी,

हाथ हर पल‌ थामना।

हर मोड़ पे साथ जो,

वो सरताज हो तुम।

दिल मे समाये वो,

राज हो तुम।


चारू मित्तल

मथुरा-उ०प्र०