मुनाफा कमाने के लिए प्राइवेट अस्पतालों ने मचा रखी है लूट, कोरोना डोज की वसूल रहे हैं मनमानी कीमत

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

दिल्ली : अलका (33) हाल ही में कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद स्वस्थ हुईं। डॉक्टरों से परामर्श के बाद उन्होंने वैक्सीन लेने के लिए कोविन वेबसाइट पर अपना पंजीयन किया और फिर 23 अक्तूबर को पूर्वी दिल्ली के मक्कड़ अस्पताल में स्पूतनिक-5 का अपॉइनमेंट भी लिया। अस्पताल पहुंचने के बाद जब वे टीकाकरण केंद्र पर पहुंचीं तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि दो डोज के 2200 रुपये आपको पहले देने होंगे। यह सुनकर वे काफी हैरान हुईं कि अभी तो उन्हें पहली ही डोज लेनी है फिर दूसरी डोज की फीस अभी क्यों? कर्मचारियों ने इसे अस्पताल का नियम बता कर कह दिया कि इतने रुपये देने ही होंगे। 

अलका बताती हैं कि वहां मौजूद कर्मचारियों का व्यवहार उन्हें काफी गलत लगा। इसकी शिकायत के लिए वह अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय तक भी पहुंचीं ,लेकिन एक घंटे इंतजार के बाद भी वह नहीं मिले और न ही अस्पताल में किसी ने कोई सुनवाई की। इसके बाद उन्होंने अपना अपॉइनटमेंट ही निरस्त कर दिया। उन्होंने बताया, ‘एक डोज के बदले दो की फीस लेने के अलावा वहां स्पूतनिक-5 की कीमत 1125 रुपये प्रति डोज है। यही डोज धर्मशिला अस्पताल में एक हजार रुपये में है। हैरानी होती है कि एक ही जिले के दो अलग अलग अस्पताल में वैक्सीन की कीमत अलग क्यों है?’

ठीक इसी तरह का दूसरा मामला रोहिणी स्थित पंकज शर्मा (45) का सामने आया। उन्होंने फोन पर बातचीत में कहा कि वे जब पहली डोज लेने गए तो उनसे जबरन दोनों डोज के रुपये लिए और वैक्सीन लगाने के बाद कहा घर चले जाओ जबकि कोविन हेल्पलाइन पर उन्हें बताया गया कि वैक्सीन लेने के बाद आधा घंटे तक वहीं चिकित्सीय निगरानी में रहना है। यह मामला रोहिणी के ही कीर्ति अस्पताल का था। अलका भी बताती हैं कि उन्होंने करीब एक घंटे तक किसी भी शख्स को वैक्सीन लेने के बाद निगरानी में रहते नहीं देखा। इन दोनों मामलों को लेकर जब संबंधित अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया गया तो किसी ने कोई जवाब ही नहीं दिया। 

जानकारी के अनुसार दिल्ली में सरकारी केंद्रों की संख्या बढ़ने की वजह से प्राइवेट में वैक्सीन की मांग कम हो गई है। पिछले दो महीने में ही इनके यहां वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या में 60 से 70 फीसदी तक की गिरावट आई है। ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों ने सरकार से वैक्सीन वापस करने की मांग तक की है। इसके चलते वैक्सीन लागत भी निकलना मुश्किल हो रहा है। साथ ही सरकार को दिए जा रहे ऑर्डर में भी प्राइवेट अस्पतालों ने अब नया ऑर्डर नहीं दिया है। इसीलिए लागत और मुनाफा निकालने के लिए मनमाने नियम बनाए जा रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि वैक्सीन की मांग कम हुई है लेकिन इस तरह की मनमानी गलत है। उनका संगठन इसका पक्षधर नहीं है।   

स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. नूतन मुंडेजा के अनुसार सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है। हर अस्पताल को वैक्सीन लगाने के बाद आधा घंटे तक चिकित्सीय निगरानी में रखना जरूरी है। इसके अलावा टीकाकरण केंद्र पर इस तरह का बर्ताव गलत है। दो डोज की कीमत एक साथ कोई नहीं ले सकता है। ऐसा मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।