मतभेद

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

मतभेदों का होना भी, किसी अच्छे निर्णय तक हमें पहुँचाता है, 

आगाज़ भले ही तकलीफ़ देह हो पर अंज़ाम निखर कर आता है, 

आपस में विचारों का मतभेद होना, होती कोई ग़लत बात नहीं, 

उचित मशवरा किसी का मान लेना, होता वह भी आसान नहीं, 

स्वाभिमान से जब ये जुड़ जाता है, अपनी ज़िद पर अड़ जाता है, 

मतभेदों में तकरार का शुरू होना, तब स्वाभाविक हो जाता है, 

मत आपस में जब टकराते हैं, बातों की तह तक पहुँच जाते हैं, 

विवेकपूर्ण तर्कों से मसले, शांतिपूर्ण माहौल में हल हो जाते हैं,   

सुख शांति से जीवन यापन के लिए समस्या को सुलझाना होगा, 

भुला मतभेद विचारों के उचित का साथ सभी को निभाना होगा, 

हर बार हम ही सही नहीं होते, ऐसी धारणा को त्यागना होगा, 

और समस्या के सबसे सटीक समाधान को हमें अपनाना होगा। 

रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)