उफ़्फ़फ़

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


बरसी अँखियाँ कुछ इस तरह

बदरी बरसे आंगन जिस तरह


भूल गये सफर इश्क़ का

मन बंजारा इस तन का


तू क्यूँ याद नहीं करता

खेल खेला यूँ ही करता


तुम बिन पल नहीं गुजरा

सितंबर इस तरह गुजरा


रीना अग्रवाल

सूरत