उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

बहुत पहले परीक्षा के लिए ‘उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे’ वाली कहावत का अर्थ सीख रखा था। मेरे दुर्भाग्य से न वह कहावत ही परीक्षा में पूछा गया और न कभी ठीक से उससे दो-चार होने का मौका। किंतु पिछले दिनों सरकार के हुक्मरानों ने उल्टा चोर बनने में कोई कमी नहीं की। बात यूँ हैं कि सरकार ने श्रम जीवियों के लिए आचार संहिता की लंबी फेहरिस्त जारी कर दी। जारी की तो जारी कि लेकिन उसमें ऐसी-ऐसी बातें लिख दीं कि मेरे पैरों तले जमीन ही हिल गयी। जानते हैं कानून बनाने वाले कौन हैं? जो कभी संसद में ठीक से क़दम भी नहीं रखते। रखते भी हैं तो अनमने-अनसुने ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। उपस्थिति दर्ज कराने के चक्कर में कई बार ऊँघते भी हैं। और इस ऊँघने को चिंतन का नाम देकर उनकी निद्रा मुद्रा वाली तस्वीर दिखाने वाली मीडिया का दोनों ओर से बैंड-बाजा धूम-धाम से बजाते हैं। जरूरत पड़ी तो बारात निकालने से भी पीछे नहीं हटते।

श्रम मंत्रालय ने इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड 2020 के खंड 29 के अनुसार कोई कर्मचारी नौकरी के दौरान कुल 23 दुर्व्यवहारों में से किसी पर भी अपनी नजर मेहबान करता है, तो अब उसकी खैर नहीं। जानते हैं ये तेईस महापाप कौनसे हैं -  नौकरी के दौरान सोना, चोरी करना, घूस लेना, कहा न मानना, विलंब से आना, शराब पीना, अनदेखा करना, नुकसान पहुँचाना, झूठी बीमारी बताना, अपने से छोटों से उपहार लेना, अपराध में लिप्त होना, लंबी अवधि के लिए गायब होना, अपने बारे में गलत जानकारी देना, बिना बताए नौकरी छोड़ना, डराना-धमकाना, हिंसात्मक भाषण देना, उकसाना, आंदोलन में भाग लेना, रहस्योद्घाटन करना, लिखित बातें तिरस्कृत करना, सरकारी चीजों की अवहेलना करना, नकली बिल लगाकर पैसों की उगाही करना आदि-आदि।

ईसा मसीह ने एक बार एक पापी औरत पर पत्थर फेंकने वालों से कहा था कि जिस किसी ने जीवन में कभी पाप न किया हो वह पहले पत्थर फेंके। उपर्युक्त तेईस पाप बनाने, मनवाने और लागू करवाने वाले वही सासंद हैं जिन्होंने कभी संसद में ऊँघने, लोगों की नींद हराम करने, नोट-वोट का खेल खेलने, चुनावी वायदों से मुँह फेरने, विधि पालन में विलंब करने, शराब का सेवन न करने, जनता की पीड़ा को अनदेखा करने, जान-माल को नुकसान न पहुँचाने, झूठी बीमारी बताकर जेल से बाहर घूमने, पदों के लिए उपहार लेने, जीवन भर निरपराधी बनकर रहने, सरकार गिराने के लिए होटलों में छिपने, सत्ता की जलेबी के लिए जीभ लपलपाने, अपनी पढ़ाई के बारे में गलत जानकारी देने, अंदर की बात बाहर और बाहर की बात अंदर न करने, बिना आंदोलन किए सत्ता के गलियारों में पहुँचने, संविधान की बातों को सरेआम अपने जूती के नीचे न कुचलने और पैसा-पैसा न करने वाले महानुभाव हैं। यदि आज ईसा मसीह होते तो इन्हें देखकर अत्यंत प्रसन्न होते कि दुनिया में महापुरुष अभी मरे नहीं हैं। इन्हें देखकर उनका सीना और चौड़ा हो जाता। वह तो भला हो उन्हें सूली पर लटका दिया गया। वरना इन्हीं महानुभावों के हाथों उनका उद्धार हो गया होता। संविधान किताबों में सम् विधान है। लेकिन संसद की गलियों और आम गलियों में वही अंतर है जो सपने और हकीकत में है। जो अपनी डिग्रियाँ छिपाते फिरे, शादीशुदा होकर खुद को कुँवारा बताते रहें, भ्रष्टाचार में तर बदन डूबे रहे, खून से सने रंगे हाथों से खुद को शराफत की मूरत कहे, ऐसे लोग श्रम की आचार संहिता बनाने वाले आज के उल्टे चोर हैं। इनके लिए आचार संहिता का उल्लंघन बहादुरी और श्रमजीवियों के लिए नौकरी से हाथ धोने की मजबूरी बन जाती है।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त, मो. नं. 73 8657 8657