आयुर्वेद के जरूरी नियम, जानिए कैसे बनते हैं योग से निरोग

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

आयुर्वेद एक ऐसी प्राचीन पद्धति है, जिसमें हर्बल व घरेलू चीजों के जरिए बीमारियों का इलाज किया जाता है। सिर्फ दवाइयां ही नहीं बल्कि योग भी आयुर्वेद का ही हिस्सा है, जो आपको बीमारियों से बचाने में मदद करता है। अगर योगियों की बात करें तो वह ना सिर्फ प्रकृति के करीब होते हैं बल्कि ताउम्र बीमारियों से भी बचे रहते हैं। यही नहीं, उनका लाइफस्टाइल व खान-पान भी सात्विक होती है। यही वजह है कि बीमारियां उनके आस-पास भी नहीं फटकती।

बेहद जरूरी है योग

योग आयुर्वेद की ऐसी प्राचीन पद्धति है, जो तन और मन दोनों को स्वस्थ रखती है। इससे ना सिर्फ आप सहनशील बनते हैं बल्कि यह धैर्य भी सिखाती हैं। ऐसी कई योग है, जिसे आप अपनी रूटीन में शामिल करके बीमारियों से बच सकते हैं। इनमें सूर्य नमस्कार, नटराजासन, प्राणायाम, मेडिटेशन शामिल है।

सिर्फ योग ही नहीं काफी

स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ योग ही काफी नहीं है। आयुर्वेद की मानें तो इसके लिए आपको सही भोजन भी लेना होगा। ऐसा भोजन जिसमें सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद हो आपको बीमारियों से बचाने में मदद करता है। इसके साथ ही यह भी बहुत जरूरी है कि आप भोजन सही समय व तरीके से लें।

यौगिक डाइट

योगी डाइट में किसी खास भोजन के बारे में नहीं बताया गया लेकिन यौगिक डाइट का जिक्र जरूर किया गया है। ऐसी डाइट शरीर को हल्का और दिनभर एनर्जेटिक महसूस करवाती हैं।

सात्विक भोजन

आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार, सात्विक भोजन में सब्जियां, घी, फल, फलियां और साबुत अनाज शामिल होता है। इसमें ज्यादातर उबला हुआ खाना होता है, जो डायबिटीज, कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों से भी बचाने में मदद करती है। वहीं इससे बॉडी डिटॉक्स और और इम्यूनिटी स्ट्रांग होती है।

तामसिक भोजन

इसमें प्याज, मीट, लहसुन, तंबाकू, मांस, शराब जैसी अनहेल्दी चीजें शामिल होती है, जो आलस्य बढ़ाती है। इस तरह के भोजन से मन में अशांति और भटकाव हो सकता है। वहीं, इनमें ऐसे मसाले होते हैं, जिन्हें दोबारा गर्म करके खाने से सेहत को नुकसान होता है।

राजसिक भोजन

पुराने समय में राज-महाराजाओं के लिए तरह-तरह के भोजन बनाया जाता था, जिसे राजसिक भोजन कहा जाता है। इनमें सूखे, कड़वे और ज्यादा एनर्जी देने वाले फूड आइटम्स शामिल होते थे। वहीं, राजसिक भोजन में कॉफी, लाल मिर्च और नमक जैसे तत्व होते हैं, जिससे हाइपरएक्टिविटी यानी अति सक्रियता की स्थिति हो जाती है।

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शरीर की जरूरतों के अनुसार लें डाइट

हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरतें अलग-अलग होती है इसलिए आपको उन्हीं अनुसार डाइट लेनी चाहिए। शरीर को जिन तत्वों की जरूरत हो, उन्हीं को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। साथ ही जिन चीजों की हमारी डाइट में जरूरत नहीं है, उन्हें बाहर कर देना चाहिए।

आयुर्वेद के जरूरी नियम

. दिनभर में कम से कम 8-9 गिलास पानी पीना जरूरी है।

. भोजन सही समय पर करें। 7-9 बजे के बीच नाश्ता, 3-4 बजे के बीज दोपहर का लंच और रात 8 बजे से पहले डिनर करें।

. भोजन करने के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। साथ ही भोजन के बाद 10-15 मिनट तक जरूर टहलें।

. सर्दी हो या गर्मी, कम से कम 20 मिनट सुबह की गुनगुनी धूप जरूर लें।

. रोजाना कम से कम 8-9 घंटे की नींद लेना जरूरी।

. दिन ब दिन बढ़ती महत्वाकांक्षाएं लोगों में तनाव का कारण बनती जा रही हैं। मगर स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि आप तनाव से दूर रहें।