व्यस्थापन गुरु श्री राम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

व्यवस्थापन गुरु जय श्री राम हैँ

जन जन के प्रभु जय श्री राम हैँ

क्यों भेजी सीता वन में राम ने

समझ ही नहीं आयी संसार के

गरीब की सुने राजा दरबार में

सिखलाया जग को श्री राम ने

माता पिता को हम कैसे पूजें

वन जाकर बतलाया श्री राम ने

राम नाम है या कोई यह जादू है

जितना पढ़ो कम रहता क्यूँ है

राम को रावण से बैर नहीं था

रावण को मरना राम से ही था

राम माफ कर सकते रावण को

पर कैसे सिखाते इस दुनिया को

वाल्मीकि तुलसी धरा पर आएं

कितना कुछ और हमें वे बतायें

मित्रता सिखलाई राम ने जग को

दया सिखलाई श्री राम ने जग को

वन में रहकर श्री राम ने बतलाया

मिट्टी से जुड़े रहो बाकी मोह माया

वनवास को अपनाया श्री राम ने

न शिकायत कोई केकई मात से

कोई क्षेत्र जग कहाँ बच पाया है

जहाँ राम ने न कुछ सिखलाया है

अहिल्या को तार दिया श्री राम ने

मानवता का पाठ पढ़ाया आपने

गुरु गृह पढ़न गए जब सब भाई

अनुशासन भाईचारे की बात बताई

धर्म हित कितना राम ने है बताया

धर्म हित रक्षसों का किया सफाया

पशु पक्षियों से प्रेम राम ने सिखाया

प्रकृति का महत्त्व सबको बतलाया

गुरु का मान राम ने है दिया बतला

पढ़ने गुरु के  ही घर जाना है पड़ता

सब देवों का राम ने मान किया था

किसी वस्तु का जब प्रयोग किया था

हर विद्या में पारंगत थे वीर श्री राम

जय हो व्यवस्थापन गुरु धीर श्री राम

पूनम पाठक बदायूँ

इस्लामनगर बदायूँ उत्तर प्रदेश