तेरी उल्फ़त व प्यार की बातें

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

(2.)    

तेरी उल्फ़त व 

प्यार की बातें ,

कितनी प्यारी थी

इज़हार की बातें ,

दिल से अपने मुहब्बत

का कुबुल करना,

हसीन थी  वो तेरे 

इकरार की बातें ,

पलट कर देखा भी

 नहीं सितमगर ने ,

बहुत याद आई तेरे

एतबार की बातें ,

तन्हाई में भी तन्हा 

मैं नहीं  हूँ यारों , 

साथ रहती है मेरे 

अब यार की बातें ,

मुश्ताक ' भुलाना 

चाहूँ तो भुलाऊ कैसे ,

याद आ ही जाती है 

दिलदार की बातें ।

डॉ . मुश्ताक़ अहमद शाह

"सहज़" हरदा मध्यप्रदेश