सतरंगी सूर्य की किरणें

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


सतरंगी सूर्य के किरणों को 

पूजते ऋषि मुनि और देवतागण,

परम सौंदर्य से सुरभित 

होता मनोहर वातावरण।


ऊर्जा का संचार है होता,

ठंड से कम्पित तन हो जाता उष्म,

दिग दिगन्त को करते 

रौशन और देदीप्यमान।


रंग बिरंगी प्रकृति भी 

इनके दम पर चलती है,

प्रकाश से इनके 

बगिया कुसुमित होती है।


सूर्यदेव के रथ को

संभालते हैं घोड़े सात,

हर घोड़ा है निराला,

सबकी निराली बात।


गायत्री, भ्राति,उश्निक, जगती, 

त्रिस्तप,अनुस्तप,पंक्ति है नाम उनका,

सप्ताह के अलग अलग दिनों को दर्शाते,

जग आलोकित करना है काम उनका।


सूर्य देव नई उषा संग 

नवजीवन का संचार है करते,

पग धरो कर्मपथ पर 

यह आगाज़ है करते।


             रीमा सिन्हा (लखनऊ)