रिश्ता चौथ के चांद संग बन गया....

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  


धरती का चांद गगन के चांद को देख थम गया,

हाथों पे रची मेहंदी का रंग प्यार के रंग में जम गया,

सोलह सिंगार, लाल चुनरी में सँवर कर फिर,

प्यारा सा इक रिश्ता चौथ के चांद संग बन गया।


पार्वती शिव की आराधना में मन रम गया,

अटूट जन्मों का अनोखा ये नाता बंध गया,

प्रार्थना तुम्हारी लंबी उम्र का वर मांग कर,

प्यारा सा इक रिश्ता चौथ के चांद संग बन गया।


इंतजार का चेहरा तुम्हें देख कर निखर गया,

चलनी में मेरी दुआओं का चांद उतर गया,

तुम्हारे हाथों से निर्जला उपवास खोल कर,

प्यारा सा इक रिश्ता चौथ के चांद संग बन गया।


चौथ का चांद साजन का चेहरा गढ़ गया,

सात फेरों से सात जन्मों का सफर बढ़ गया,

मांग सिंदूरी भर ,सुहागिन का यह व्रत कर,

प्यारा सा इक रिश्ता चौथ के चांद संग बन गया।


अंशिता त्रिपाठी          

 लंदन