इश्क़_का_मुकाम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  


ए रब्बा मुझे ऐसी मुहब्बत दे दे।

मलंग सी मुझे ऐसी,चाहत दे दे।।


शबनम के पोर पर अक्स देखूं।

मालिक मेरे ऐसा,आईना दे दे।।


नाम मेरा लेकर चिढ़ाये जमाना।

ऐसी महक उसके,नाम की दे दे।।


मिटा लूं खुद को चाहत में उसके।

रब्बा ऐसा इश्क़ का,अंजाम दे दे।।


भूले लैला,शमा,शिरी,जूलियट।

इश्क़ में याद रीना हो,मुकाम दे दे।।


रीना_अग्रवाल

सूरत