भारतीय चिड़ियाघरों से स्थानीय पक्षियों और जानवरों के संरक्षण के लिए वैश्विक मानकों के स्तरपर विज़न प्लान 2021-2031 जारी

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

गोंदिया - भारत को वैश्विक रूप से सोने की चिड़िया का दर्ज़ा और रुतबा यूंही नहीं मिला था, उसके कई सकारात्मक कारण थे जिनमें प्राकृतिक खनिजों का अभूतपूर्व भंडार, जैविक विविधता की अपार शक्ति, दुर्लभ किस्म के स्थानीय पशु-पक्षियों सहित वन्यजीवी विविधता प्राणी, सकारात्मक आर्थिक संपन्नता, संस्कृति, आध्यात्मिकता, सभ्यता का अभूतपूर्व प्रचलन, नैतिकता, कुछल व्यापार, कार्यबल संपन्नता, इमानदारी सहित अनेक ऐसी खूबियां समाहित थी जो पूरे विश्व को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी।...साथियों मेरा मानना है कि कहींना कहीं अंग्रेजों की भारत पर राज़ करने की कुदृष्टि के अन्य कारणों में यह भी एक मजबूत कारण हो सकता है, जिसका सैकड़ों साल दोहन अंग्रेजों द्वारा किया गया होगा। आज हम देख रहे हैं कि पाश्चात्य संस्कृति के चलते उपरोक्त हमारी धरोहर में से कुछ ने विलुप्तता की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। हालांकि विभिन्न कानूनों शासकीय- प्रशासकीय मानवीय, सामाजकीय स्तर पर इन्हें बचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है, फ़िर भी हमें जनजागृति अभियान चलाकर हमारी धरोहर को विलुप्तता से रोकना होगा।...साथियों बात अगर हम भारत में स्थानीय पक्षियों वन्यजीवों की अनेक प्रजातियों, किस्मों की करें तो कई जीव व पशु पक्षी विलुप्त हो चुके हैं और अनेक जीवों की स्थिति विलुप्त होने के कगार पर है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो जैविक विविधता का भारतीय ढांचा बिगड़ जाएगा और आने वाली भारी विपत्तियों का सामना हमारी आने वाली पीढ़ियों को करना पड़ेगा। हालांकि इस ओर कदम शासन-प्रशासन ने बढ़ा दिए है और अनेक क्षेत्रों के लिए विज़न 2030, 2040, 2050 तक बनाए जा रहे हैं जो सकारात्मक सौद्रहता का संकेत है और यही भारत की ख़ूबसूरती भी है कि दूरदर्शिता का गुण जो भारत माता की मिट्टी से हमें मिला है, हमारे खून में समाहित है, उस दूरदर्शी का गुण का उपयोग हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कर रहे हैं...। साथियों बात अगर हम पक्षियों के विलुप्तता की करें तो बहुत ही सामान्य बात अभी हमें श्राद्ध पक्ष में देखने को मिली कि,, कौउवों को देखने और उन्हें भोजन भोग लगानेके लिए हम तरस गए थे। कौवे कहीं नज़र नहीं आ रहे थे। हालांकि एक समय था ज़ब हर स्थान, शहर, गांवों में अनेकों कौउवे नजर आते थे। ठीक उसी तरह अनेक पक्षियों वन्यजीवों की प्रजातियां विलुप्तता ओर है, जिसे हम सभी को मिलकर बचाना होगा...। साथियों बात अगर हम चिड़ियाघर प्रबंधन और जीवों के संरक्षण संबंधी दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की करें तो पर्यावरण वन जलवायु मंत्रालय के पीआईबी के अनुसार इस राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश में चिड़ियाघर प्रबंधन और जीवों के संरक्षण को लेकर उभरी नई बातों पर चर्चा और विचार-विमर्श करना था। आज की स्थिति में देश भर में 150 से अधिक मान्यता प्राप्त चिड़ियाघर और बचाव केंद्र हैं जो वन्यजीव कल्याण केदिशा-निर्देशों और उच्च मानकों का पालन करते हैं। विज़न प्लान 2021 -2031-भारतीय चिड़ियाघरों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को मजबूत करने के लिए विज़न प्लान 2021- 2031जारी किया गया। यह विज़न दस्तावेज अद्वितीय पशु देखभाल, अत्याधुनिक अनुसंधान और सभी उम्र के लोगों के साथ तालमेल बिठाते हुए आकर्षक आगंतुक अनुभव प्रदान करके केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) और भारतीय चिड़ियाघरों को संरक्षण के लिए एकबड़ी ताकत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पूरे 10 साल का यह विज़न प्लान (दृष्टि योजना) आंकड़ों के गहन अध्ययन और हितधारक परामर्श प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया और इससे भारत में संरक्षण दृष्टिकोण पर एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सम्मेलन के दूसरे दिन,देश में चिड़ियाघरों के वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें वन्यजीव व्यापार की चुनौतियों से निपटने और संरक्षण के विज्ञान में नागरिकों को शामिल करने और इस प्रकार भारतके सभी चिड़ियाघरों के लिए सर्वोच्च महत्व वाले पीपल्स कनेक्ट अवधारणा को सुरक्षित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता चिड़ियाघर और वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों ने की जिसमें कई तरह के विचार-विमर्श और चर्चाएं शामिल थीं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने टकराव रोकने की रणनीतियों में संरक्षण जागरूकता और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने चिड़ियाघर के अधिकारियों के सुझावों को शामिल करते हुए और उन सुझावों के आधार पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्य योजना तैयार करनेके साथ चिड़ियाघरों और नगर वनों के लिए एक समावेशी रास्ता प्रस्तावित किया।उन्होंने इन सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने सत्र में शामिल वक्ताओं और चिड़ियाघर समुदाय को अपने निस्वार्थ कार्य और वन्यजीवों तथा जंगली आवासों के संरक्षण के लिए नवाचारों और प्रयासों को जारी रखनेके लिए प्रोत्साहित किया। चिड़ियाघरों के लिए वॉश मैनुअल सार्वजनिक स्थानों पर जल और स्वच्छता हासिल करना स्थायी वॉश (डब्ल्यूएएसएच) प्रबंधन का एक अनिवार्य तत्व है। सीजेडए ने चिड़ियाघरों को उनके परिसर में कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए वॉश सुविधाएं बनाने और उसे बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए यूनिसेफ के सहयोगसे अब एक दिशा-निर्देश विकसित किया है। देश भर के चिड़ियाघरों केसमर्थन में सीजेडए स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मनाने के लिए 12 मार्च 2021 को माननीय पीएम द्वारा किए गए स्पष्ट आह्वान का पालन करने के लिए तैयार है। महोत्सव का विषय 75 चिड़ियाघरों में 75 प्रजातियों का प्रदर्शन करना है, हालांकि 75 हफ्तों में बड़े पैमाने पर आउटरीच कार्यक्रम हैं। पहल की शुरुआत के बाद से, 1 हज़ार घंटे से अधिक की पहुंच हासिल की जा चुकी है। इसे प्रदर्शित करने और संकलित करने के लिए पहले 25 सप्ताहों के दौरान समारोहों का कॉफी टेबल बुक की तरह का एक संकलन वॉल्यूम एक भी आज लॉन्च किया गया। इस अवसर पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो द्वारा निर्मित एकआउटरीच फिल्म भी जारी की गई जिसका शीर्षक था प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना, वन्यजीवों के अवैध व्यापार को रोकना ।अतः अगर हमउपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारतीय चिड़ियाघरों के स्थानीय पक्षियों और जानवरों के संरक्षण के लिए वैश्विक मानकों के स्तर पर विज़न प्लान 2021 -2031 सराहनीय है हमें चाहिए कि स्थानीय पक्षियों वन्यजीवों की विलुप्तता वाली प्रजातियों के संरक्षण पर प्राथमिकता से ध्यान केंद्रित करना अत्यंत जरूरी है। 

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र