इंसान की फितरत

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


अजीब फितरत है

इंसान की!


बोलना चाहता है

लेकिन

सुनना उतना चाहता नहीं,


ज्ञान बांटना चाहता है

लेकिन

ग्रहण करना उतना नहीं,


प्रेम पाना चाहता है

लेकिन

देना उतना चाहता नहीं,


सुविधाएं चाहता है

लेकिन

मेहनत उतनी चाहता नहीं,


बदलाव चाहता है

लेकिन

संघर्ष उतना चाहता नहीं,


सम्मान चाहता है

लेकिन

कमाना उतना चाहता नहीं,


स्वास्थ्य चाहता है

लेकिन

व्यायाम करना चाहता नहीं,


लिखना चाहता है

लेकिन

पढ़ना उतना चाहता नहीं,


कितनी विसंगतियां हैं

इंसान में!

महान कहलाना चाहता है

लेकिन

इंसान कहलाना चाहता नहीं।


                  जितेन्द्र 'कबीर'