"रुस्तमेजहाँ " गामापहलवान "

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

" गुलाम_मोहम्मद "

२२ मई १८७८ जन्म गुजरावाला पंजाब  -

२३ मई  १९६०  मृत्यु  

शायद ही कोई  हो जिसने " गामा पहलवान " का नाम न सुन रखा हो। विश्व चैंपियन पहलान उनके बाद कोई भारत क्या एशिया से नहीं  हुआ। अब तक  ।

संक्षेप में - फेसबुक की सीमा में लिखने का प्रयास लेकिन  कुछ बड़ा या अझेल हो जाय तो खेद सहित ।।

अथाह शक्ति के  बालक की क्षमताओं का पता मात्र १० वर्ष की उम्र में ही मिल गया जब महाराज  जोधपुर  ने जोधपुर में पहलवानों का दंगल रखा  तो  ४०० पहलवानों में से  केवल  १५ छांट कर निकाले  गये

और  उनमें  सबसे कम उम्र के  " गुलाम_मोहम्मद " जिन्हें महाराज  ने प्यार से  " गामा " नाम दिया और  फिर वही नाम  दुनिया ने  जाना  - पहचाना और उसे ही सम्मानित किया।

पहली  बड़ी  कुश्ती

गामा  के पहले कुश्ती में सबसे बड़ा नाम था  " रहीमबक्ससुल्तानी " और  उनसे ही  १९०८ में  मुकाबला  हुआ ।

सुल्तानी की  लम्बाई  ७ फुट और कैरियर के उतार पर था। 

और गामा  की  लम्बाई  ५ फुट  ७ इंच  परन्तु  उठान पर कुश्ती बराबरी पर २ घण्टे ३५ मिनट

१९१० में  अपने छोटे भाई  इमाम बक्स  के  साथ  लन्दन में होने वाले  WORLD  CHAMPION  मुकाबले के लिए  लन्दन गए  ।

कम लम्बाई के कारण पहलवानों की सूची  में  #आयोजन_समिति  नहीं  रख रही थी  तो 

उन्होंने ने  Open Challenge  किया । #महाराजजोधपुर ने चैम्पियनशिप की धनराशि के बराबर का  पुरस्कार  रख दिया कि  अभी  गामा  को हराने वाले को तुरंत दे दूंगा - अन्यथा  गामा  को  चैम्पियनशिप  में  लडने  का  अवसर  दिय़ा  जाए ।

तब  अन्ततः 

आयोजन समिति  ने  USA_Champion

Benjamin_Roller  से तीन  बार मुकाबला  करने का आदेश दिया।

पहली  बार  मात्र  १ मिनट  ४० सेकेंड  में  

दूसरी बार  ९ मिनट  १० सेकेंड  में  अमेरिका चैंपियन को पराजित कर दिया।

तीसरे  बार के लिए  बेंजामिन तैयार नहीं  हुआ , पराजय स्वीकार कर लिया।

प्रमुख  पहलवानों के नाम जिन्हें  World Champion  मुकाबले में  पराजित किया  ।

John  Lemm  European Champion

Benjamin Roller   usa champion

Maurice Deriaz   France

Taro Miyake  Japan  

And  above all  The.   Champion  of World 

JESSE PETERSON  of  Sweden

अन्ततः  १० सितंबर  १९१० से  प्रारंभ इस आयोजन का  फाइनल  मुकाबला

१५ अक्तूबर  १९१०  गामा पहलवान 

को  पूरी  दुनिया ने  जाना  - पहचाना  -सम्मानित किया

विश्व_चैम्पियन  - रुस्तमे जहाँ -World Champion.

1910 के बाद  १९२७ तक  

किसी  पहलवान ने  लडने की हिम्मत नहीं किया ।

१९२८  European Champion Zbyszko पटियाला आया । गामा पहलवान से मुकाबले की इच्छा किया।

स्वयं पटियाला_महाराज की उपस्थिति में मुकाबला हुआ।

लेकिन  दर्शक वर्ग  को  मजा नहीं  आया ।

सोचिए क्यों  नहीं  मजा आया ?

क्यों कि कुश्ती गामा पहलवान ने मात्र  ४२ #सेकेंड

में जीत लिया।

स  एक  मिनट और  ।

एक जरूरी  बात और वह  शुद्ध  शाकाहारी थे  ।

केवल १० सेर दूध  एक सेर बादाम  एक  समय। 

और  फलों  का जूस ।

 सुबह और इतना  ही शाम को। 

व्यायाम  में  पाँच_हजार_बैठक  तीन  हजार  दन्ड 

और  चालीस पहलवानों से  कुश्ती।

१९२२  में  प्रिन्स आफ वेल्स  भारत  आये  तो  महावीर

" श्री हनुमान जी  " के  प्रिय शस्त्र  के रूप में  

शुद्ध  चाँदी  की  गदा " गामा पहलवान  " को 

भेंट किया।  

यद्यपि  कि 

" गामा  कुश्ती कला  में  कृष्ण  को अपना आदर्श  मानते थे ।"

आजादी  या विभाजन के बाद लाहौर चले गए। अन्ततः बहुत बीमार रहने लगे। अस्थमा सहित जोड़ों का दर्द जो पहलवानों को मिलता ही है।

भारतीय उद्योगपति  बिड़लाजी  ने २०००रुपया एकमुश्त और  रूपए तीन सौ  ३००/ महीने का खर्च भिजवाने का अपनी ओर से  इंतजाम कर दिया। 

उस जमाने में  कमिश्नर का भी  वेतन  300/ नहीं था ।

उन्होंने दो  विवाह किया था। दूसरी पत्नी  और उनके बच्चे पाकिस्तान नहीं गए  । बड़ौदा गुजरात में अभी उनके बंशज रहते  हैं।

भारत माता के इस अप्रतिम महावीर  पुत्र  के  परमपवित्र चरणों में  कोटिशः नमन - हार्दिक श्रद्धा सुमन  ।।


RAMADHEEN SINGH 

Ex PRESIDENT

UNIVERSITY OF ALLAHABAD 

Oh 9415000981