अपने आप में संपूर्ण वास्तु हैं भगवान श्रीगणेश, मन से करें इनकी उपासना

सभी देवों में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की उपासना से समस्त वास्तु दोष दूर होते हैं। भगवान श्रीगणेश का जहां नित पूजन होता है, वहां रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का वास होता है। मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने वास्तुशास्त्र के नियमों की रचना की। यह मानव कल्याण के लिए बनाया गया लेकिन इनकी अनदेखी पर घर के सदस्यों को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। भगवान श्री गणेश की आराधना के बिना वास्तु देवता को संतुष्ट नहीं किया जा सकता। वास्तु में भगवान श्रीगणेश से जुड़े कुछ उपाय बताए गए हैं आइए जानते हैं इनके बारे में।

भगवान श्रीगणेश अपने आप में संपूर्ण वास्तु हैं। उनकी उपासना से नौ ग्रहों का दोष भी आसानी से दूर हो जाता है। सर्वमंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी या लाल रंग के श्री गणेश जी की उपासना अनुकूल रहती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। सुख, शांति, समृद्धि की चाह रखने वालों के लिए सफेद रंग के विनायक की मूर्ति या चित्र लगाना चाहिए। घर में चित्र लगाते समय ध्यान रखें कि मंगलमूर्ति की मूर्ति या चित्र में मोदक या लड्डू और चूहा अवश्य होना चाहिए। वास्तु के अनुसार श्रीगणपति की तीन मूर्तियां घर में नहीं होनी चाहिए। हालांकि घर में तीन से कम या फिर ज्यादा मूर्तियां रखी जा सकती हैं। 

घर में तीन मूर्तियां होना अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार गाय के गोबर से बने श्रीगणेश घर के लिए शुभ माने जाते हैं। इन्हें घर में रखने से कभी भी दुख की छाया नहीं आती। घर में गणपति की क्रिस्टल की मूर्ति रखना भी शुभ माना जाता है। इस तरह की मूर्ति घर में रखने से वास्तु दोष कट जाते हैं। वास्तु के अनुसार हल्दी के बने श्रीगणेश की मूर्ति भाग्य को चमकाती है। श्रीगणेश की मूर्ति का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। माना जाता है कि यहां भगवान शिव रहते हैं। घर में बैठे हुए श्रीगणेश तथा कार्यस्थल पर खड़े हुए श्रीगणेश का चित्र लगाएं। ध्यान रखें कि खड़े श्रीगणेश के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कार्य में स्थिरता आती है। पूजास्थल के अलावा स्‍टडी रूम में भगवान श्रीगणेश की मूर्ति को रखा जा सकता है।