जलन तेजाब की

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

जो तूने फेंका मेरे 

चेहरे पर तेजाब

एक बूंद तो इसकी

अपने चेहरे पर लगा कर देख

तब पता चलेगा तुझे

क्या होती है जलन

जब एक बूंद से तेरा 

चेहरा जल जाएगा

तब तुझे मेरा दर्द 

समझ आ जाएगा

मैं कितना तड़प रही थी

जब तूने था मुझको जलाया

बेसुध हो वहीं गिर पड़ी थी

जहां तूने था मुझे तेजाब से जलाया

जब होश मुझे आया था

सब कुछ बदला हुआ पाया था

सिर्फ मेरे चेहरे को ही नहीं

तूने तो मेरी आत्मा को 

भी जलाया था

कल तक में मां 

पापा की परी थी

आज मुझे मेरे 

चेहरे ने ही डराया था

कल मैंने ना तेरे 

प्यार को कुबूल किया

तो तूने मेरे साथ कैसा 

बुरा सलूक किया

अगर आज कहूं मैं की 

मुझे तुमसे प्यार है

तो क्या आज तुम्हारी हां है

नहीं !आज तेरा हां नहीं ना है

तूने प्यार किया था मेरे सुंदर चेहरे से

आज मिटा मेरी सुंदरता

तेरा प्यार कहां रह जाएगा

सच कहती हूं वो पागल आवारा

तू तेरे चेहरे पर पड़ा

एक छोटा सा दाग नहीं सह पायेगा

तब क्या सोच मुझे था जलाया

क्या मेरा दाग तू कभी मिटा पाएगा

क्या फिर से मुझे सुंदर बना पाएगा

ठीक किया था मैंने

जो तेरा प्यार ठुकराया था

तेरे जैसे पागल से अपना 

पीछा छुड़ाया था


बबली कुमारी

डेहरी ऑन सोन,रोहतास-बिहार