मोहब्बत और मौत

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


मोहब्बत और मौत

के बीच जंग छिड़ रही थी।

मौत के आगे मोहब्बत

बेबस सी लग रही थी।

चंद लम्हों की मोहब्बत

दिल को ढूंढ रही थी।

धड़कनों पर काबू रख

निगाहों को थाम रही थी।

एक को दिल की चाहत थी

दूसरे को धड़कनों की जरूरत थी।

मौत व मोहब्बत के बीच

जंग छिड़ रही थी।

मोहब्बत ने थाम रखा था।

कसके हाथ पकड़ रखा था।

मौत भी मोहब्बत के संग

आँसू बहा रही थीं।

बेबस लाचार वो भी बँधी हुई थी।

संग अपने वो मोहब्बत को ले गई।

मौत जीत चुकी थी, मोहब्बत हार गई थी।


कवयित्री:-गरिमा राकेश गौतम

पता:-कोटा राजस्थान