कोमल हृदय की सिसकियाँ

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


माँ मुझे लोरी सुना दे, कलरव की बोली सुना दे!

बिक गई बाज़ार में मैं, स्वयं के हुँकार में मैं!!

औरों ने तो अनसुनी की, ममता के तो प्राण में मैं!

माँ मुझे लोरी सुना दे, कलरव की बोली सुना दे!!

है अगर अभिमान तुझमे,जन्म का हक मुझको दिला दे!

माँ मुझे लोरी सुना दे, कलरव की बोली सुना दे!!

तोड़ दे वो दुर्ग अपनी, दुर्गति जिसने दिलाई!

माँ  मुझे लोरी सुना दे ,कलरव की बोली सुना दे!!

न्याय की मूर्ति मुझे भी अद्ल अपना सुना दे!

माँ  मुझे लोरी सुना दे ,कलरव की बोली सुना दे!!

है तेरी भीषण परीक्षा,सिद्ध कर सामर्थ्य अपनी!

माँ मुझे लोरी सुना दे ,कलरव की बोली सुना दे!!

 मैं करू कर जोर आग्रह, खिलने का गौरव दिला दे!

माँ मुझे लोरी सुना दे ,कलरव की बोली सुना दे!!

गगन ऊँचा चमन ऊँचा ,उच्श्रृंखल मुझको बना दे!

माँ मुझे लोरी सुना दे ,कलरव की बोली सुना दे!!

 

 -- रिचा बंदना

पीएचडी शोधार्थी, महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी