मैं मशीन नहीं हूँ

                                             

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

जब कोई काम में देरी हो, 

कोई मुझे टोक दे, 

जब मुझे गुस्सा आता है,

मैं कहती हूँ मैं मशीन नहीं हूँ

 बाद में सोचती हूँ, 

सचमुच मैं मशीन नहीं हूँ,

मशीन खाना पकाती है,

पर स्वाद नहीं जानती

 मशीन कपड़े धोती है,

पर मैच नहीं जानती, 

कोई उदास होता है, 

उदासी का कारण पूछती हूँ                         

छींक आये किसी को, 

तो अदरक वाली चाय, 

सबकी पसंद नापसंद, 

का ख्याल रखती हूँ                            

धूप सर्दी बारिश ज्यादा है,

याद दिलाती रहती हूँ,

कोई रूठें तो झट से, 

ख़ुशी से मना लेती हूँ                                  

कोई मेरा ध्यान न रखे, 

यह मन में दवा लेती हूँ, 

भावनाओं को समझती हूँ, 

ख़ुश रहती हूँ खुशी से

 सोचती हूँ मैं मशीन नहीं हूँ, 

सचमुच मैं मशीन नहीं हूँ,

जब कोई काम में देरी हो,

 कोई मुझे टोक दे...

पूनम पाठक बदायूँ

इस्लामनगर बदायूँ उत्तर प्रदेश