दर्द का रिश्ता

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

दर्द का तो दिल से रिश्ता गहरा है,

आंखों ने बिठाया इस पर पहरा है।

आंखें तो नीर बहाती है बेवजह,

दिल की तड़पन का दर्द से रिश्ता ऐसा है।

मानो दर्द भरी बदली दिल में बसती है,

देखिए उन दोस्तों का जो हाल ए दिल पूछते हैं।

दिए हुए जख्म पर मलहम लगाने की बात पूछते हैं,

हमारा दिल तो खून के आंसू रो रहा है।

दोस्त के गम की जुदाई में पल पल मर रहा है,

कैसे कहूं प्यार बताओ अपने दिल का,

जुदाई में तेरी यूं ही तड़प रहा है।

माना कि प्यार किया है तो दर्द तो होगा ही,

जितनी शिद्दत से  तुझे चाहा है,

दर्द उतना अधिक होगा।

व्यथा मेरे दिल की कोई समझे ना,

नैनो से नीर कब तक बहेगा ,

कोई पूछने वाला नहीं होगा।

नीर ही नीर आँखो से बहेगा

बस दिल का दर्द आंखों से बहेगा।।

                     रचनाकार ✍️

                     मधु अरोरा

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