जिला कारागार, गोण्डा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

गोंडा । मा0 जनपद न्यायाधीश श्री मयक कुमार जैन के निर्देश के अनुपालन में जिला कारागार , गोण्डा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा के सचिव श्री कृष्ण प्रताप सिंह द्वारा किया गया । विधिक साक्षरता शिविर में सचिव श्री सिंह द्वारा विचाराधीन बन्दियों के शिकायतों के निराकरण ' के बावत जानकारी देते हुए बताया गया कि जेल में निरूद्ध विचाराधीन बन्दियों के अधिकारों की बात प्रत्येक स्तर पर होती रही है । सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों ने अपने कई निर्णयों में सजायपता और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों के बारे में उल्लेख किया है । विचाराधीन कैदी या फिर सजायाफ्ता कैदी के अधिकार जेल में भी बने रहते हैं और कानून के हिसाब से ही उनके अधिकारों पर अंकुश लगाया जा सकता है आपराधिक विधि के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता , जब तक कि न्यायालय आरोपी को दोषी नहीं मानता। जब भी किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई आरोप लगाया जाता है तो वह मात्र आरोपी होता है। ऐसे में उसे यह संवैधानिक अधिकार है कि उसे अपने बचाव का मौका मिले। इस सन्दर्भ में संविधान के अनुच्छेद -22 में मूल अधिकार है कि प्रत्येक आरोपी को बचाव का मौका दिया जाए । इसके तहत अदालत का कर्तव्य है कि जब भी कोई आरोपी अदालत में पेश हो तो वह उससे पूछे कि क्या उसे वकील चाहिए ? वकील न होने पर अदालत आरोपी को सरकारी खर्चे से वकील मुहैया कराती है।  इस अवसर पर जिला कारागार के जेलर दीपाकर भारती , उप कारापाल विवेक सिंह तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक मुकेश कुमार वर्मा व अन्यकर्मचारीगण आदि उपस्थित रहे।