विश्वास टूटता ही गया!

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  


विश्वास टूटता ही गया 

जैसे-जैसे जुड़ता गया

परिचय का सूत्र...!

बढ़ते गये विचार सूत्र

खुलती रही परतें फिर

खोखली निकली बातें

नैतिकता की नकाब

मर्यादा का आवरण

झूठे थे सारे छंद...!

जैसे-जैसे ठगा गया

खाता गया ठोकर मैं

विस्तार होता रहा तीव्र

बुद्धि पा गया असीम

विनम्र होता गया...!

जैसे-जैसे घुलता रहा

स्वार्थ की परतें खुलती

लोग रोपते रहें खंजर

शहद सी मीठी वाणी 

जैसे-जैसे जुड़ा जग से

परिचय का सूत्र...!

विश्वास टूटता ही गया।


परिचय - ज्ञानीचोर

शोधार्थी व कवि साहित्यकार

मु.पो. रघुनाथगढ़, सीकर राज.

मो. 9001321438