किसानों के खेतों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की कवायद - संघ राज्य क्षेत्रों का सम्मेलन आयोजित - कृषि विकास को लेकर विशेष चर्चा

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

गोंदिया - वैश्विक रूप से कोविड -19 से महत्वपूर्ण हद तक राहत पाने के बाद, अब दुनिया के देश अपनी अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, महामारी से मुकाबले से सीखेंअनुभवों का सकारात्मक उपयोग करने, विपरीत परिस्थितियों की सीख़ को भविष्य के लिए सुरक्षित मार्ग प्रशस्त करने और खासकर स्वास्थ्य, कृषि, प्रौद्योगिकी विकास के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर शोर से भिड़ गए हैं।...साथियों बात अगर हम भारत की करें तो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हम देख व सुन रहे हैं कि भारत भी तीव्र गति से स्वास्थ्य, कृषि और प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में जी-जान से आगे बढ़ रहा है और महामारी के दौर में मिले अनुभवों को भविष्य की सुरक्षा के लिए मुकाबला करने इंफ्रास्ट्रक्चर रूपी ढाल बनानेमें कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है।...साथियों बात अगर हम कृषि क्षेत्र की करें तो भारत वैश्विक रूप से कृषिउत्पादों की आपूर्ति करने वाला प्रमुख देश है और अर्थव्यवस्था में भी कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। दशकों से हर केंद्र और राज्य सरकारें कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते आए हैं। क्योंकि भारत कृषि प्रधान देश है और अधिकतम नागरिकों की आजीविका कृषि पर निर्भर है।...साथियों बात अगर हम वर्तमान में कृषि के आधुनिकता के दौर की करें तो हमने देखे 14 सितंबर 2021 को पांच निजी बढ़ी कंपनियों के साथ पायलट परियोजनाओंं पर समझौता हस्ताक्षर हुए। डिजिटल कृषि मिशन 2021-25 की ओर एक कदम आगे बढ़ाते हुए दिनांक 15 सितंबर 2021 को सभी केंद्र शासित प्रदेशों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें कृषि विकास को लेकर विशेष पर चर्चा की गई और किसानों की फ़सलों का वाजिब दाम मिले, उनकी लागत में कमी आए, कृषि क्षेत्र को आसान करने की जुगत में किसानों के खेतों के पास ही इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की कवायद की जा रही है। हालांकि कृषि विभाग द्वारा कुछ समय से इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, जो हमने संचार माध्यमों के माध्यम से सुने थे।...साथियों बात अगर हम दिनांक 15 सितंबर 2021 को केंद्र शासित प्रदेशों के केंद्रीय कृषि मंत्री की उपस्थिति में एक सम्मेलन की करें तो पीआईबी के अनुसार यह वर्चुअलआयोजित किया गया था जिसमें  उन्होंने कहा, कि कृषि का क्षेत्र देश में अर्थव्यवस्था के साथ ही हर दृष्टि से महत्वपूर्ण है, इसीलिए पीएम का जोर है कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव प्रयत्न किए जाएं, फलस्वरूप अनेक योजनाएं संचालित की रही है। इनका शत-प्रतिशत क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता से हो रहा है। उन्होंने कहा संघ राज्य क्षेत्र व केंद्र सरकार एक ही परिवार है, वहां योजनाओं का सुचारू संचालन होगा, तो सभी राज्यों में भी बेहतर क्रियान्वयन करने में ताकत मिलेगी। केंद्र की किसी भी योजना के लिए फंड की कहीं -कोई कमी नहीं है और सहयोग के लिए सरकार पूरी ताकत से खड़ी हुई है। सभी, टीम भावना से मिलकर परिश्रम करें तो सफलता जरूर मिलेगी, आगे कहा कि केंद्र सरकार कृषिक्षेत्र के समग्रविकास के लिए प्रतिबद्ध है, इसी अनुरूप अनेक ऐसी योजनाएं चलाई जा रही है, जिनके बारे में कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। एक लाख करोड़ रूपए के फंड से सरकार किसानों के खेतों के पास इंफ्रास्ट्रक्टचर बनाने खड़ी हुई है। कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों के लिए पीएम ने डेढ़ लाख करोड़ रू. से ज्यादा राशि विशेष पैकेजों के रूप में उपलब्ध कराई है, जिसके अंतर्गत प्रोजेक्ट प्रस्तुत करते ही कृषि मंत्रालय की टीम बैंकर्स से इन्हें मंजूर कराएगी। देशभर में गांव-गांव और खेतों के पास तक इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाने पर किसान अपनी उपज़ को कुछ समय रोककर बाद में वाजिब दाम पर बेच सकेंगे। उन्होंने बताया कि डिजीटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत साढ़े पांच करोड़ किसानों का डाटाबेस तैयार हो चुका है, दिसंबर तक यह आठ करोड़ तक पहुंच जाएगा। उन्होंने संघ राज्य क्षेत्रों से इसमें सहयोग का आग्रह किया। आगे कहा कि कम रकबे में वैश्विक मानकों के अनुरूप महंगी फसलों तथा आयल पाम की खेती के लिए संघ राज्य क्षेत्रों में काफी संभावनाएं है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के प्रवास के दौरान भी वहां खेती क्षेत्र में उन्हें काफी उत्साह का वातावरण देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत किसानों को वित्तीय मदद के लिए पीएम ने इस साल सोलह लाख करोड़ रूपए का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अभी चौदह लाख करोड़ रूपए किसान उपयोग कर रहे हैं। पीएम द्वारा पिछले साल फरवरी में प्रारंभ किए गए केसीसी के अभियान के बाद से सालभर में कोऱोना के बावजूद राज्यों व बैंकों के सहयोग से दो करोड़ से ज्यादा किसानों को लगभग ढाई लाख करोड़ रूपए उपलब्ध हुए है। पीएम किसान सम्मान निधि (पीएम- किसान) योजना पारदर्शिता व गतिशीलता की अनूठी मिसाल है, जिसमें 11.37 करोड़ किसानों को 1.58 लाख करोड़ रूपए सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराए गए हैं। इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं, न ही अमानत में खयानत, यह बदली हुई व्यवस्था में टेक्नालाजी की सहायता से एक प्रकार का चमत्कार ही है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि किसानों के खेतों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कर क्रियान्वयन करना जरूरी है, क्योंकि कृषि क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है और खेतों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने से किसानों को फसलों का वाजिब दाम मिलेगा। 

-संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र