तैयार रहें आतंक के अंत के लिये

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

आज हम सभी को आतंकवाद और आतंकवादियों को प्रश्रय, शरण या बढ़ावा देने वाले सभी कारकों के खिलाफ एक जुट होकर संपूर्ण विश्व को मजबूत करना होगा। आतंकवादियों के हौंसले दिन पर दिन बड़ते ही जा रहे हैं। आतंकवादी ताकत का अंत बड़े ही संयम,सूझबूझ और सक्रियता के साथ विश्व के समस्त देशों की सरकार और वहां के नागरिकों को संयुक्त रूप से करना होगा। तभी संपूर्ण विश्व विश्वशांति,लोककल्याण एवं निःशस्त्रीकरण जैसे वृहद् वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेगा। हमारे देश भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो विश्व के विभिन्न देशों के साथ मिलकर हमें इस कार्य को करना होगा। आतंकवादियों को मानव बम कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इससे निपटने के लिये आतंकवादियों के सामाजिक,आर्थिक,सैन्य एवं खाद्य तंत्र को पूर्णरूप से समाप्त करना होगा। अक्सर देखा गया है कि पकड़े गये आतंकवादियों का ट्रायल द्रुतगति से नहीं होता है। कहीं ना कहीं ढिलाई के कारण व कानूनी दांवपेंच में सफलता प्राप्त कर आतंकवादी छूट जाते हैं। इसलिये इस तरह की व्यवस्था की जानी चाहिये की इन्हें यथा शीघ्र दण्ड मिल सके। इसके लिये कानून में समय-समय पर जरूरी संशोधन करें जायें।इसके साथ ही समाज का कोई भी वर्ग क्यों ना हो चाहे वह सामान्य व्यक्ति हो या गैर सामान्य अथवा अधिकारी या जनप्रतिनिधि।जिनके भी द्वारा आतंकवादियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन एवं सहयोग हांसिल हो उन पर कड़ी नजर रखते हुये उन्हें भी दंड का भागी बनाया जाये। ताकि विश्व एवं समाज में फैले आतंकवादी तंत्र को शीघ्रता पूर्वक कारगर तरीके से समाप्त करा जा सके। इसके लिये असहिष्णुता की नीति या Policy of zero Tolerance का सहारा लेना चाहिये। इसके साथ ही आतंकवादियों का यदि प्रत्यर्पण होना है तो इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाये एवं इसके लिये अंतर्राष्ट्रीय कानूनों में समय-समय पर संशोधन भी करा जाना चाहिये। और यह कानून विश्व के समस्त देशों पर बाध्यकारी हों। कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाये जिससे इन्हें शीघ्र दंडित करा जो सके। आतंकवादी वर्ग अक्सर लोकतांत्रिक सरकारों की उदारता को उनकी कमजोरी मान लेता है। और उसी का फायदा उठा अपनी आंतकवादी गतिविधि चलाता रहता है। देश के भीतर पनप रहे ऐसे आतंकवादी जो क्षणिकसुख के लिये छोटे-बड़े अपराधी तत्वों से जुड़ संगठन का निर्माण कर घृणित व अमानवीय कृत्य करने  से परहेज नहीं करते हैं ऐसे पशु के समान आतंकियों से कठोरता से निपटना ही एकमात्र उपाय होगा। हमारे देश सहित सम्पूर्ण विश्व में इनके खात्मे के लिये जल,थल व वायुसेना जहां जैसा उचित हो उपयोग करा जाना चाहिये। विश्व के सभी देशों की पुलिस व सैनिकों को अत्याधुनिक अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित एवं इनसे संबंधित तकनीकी जानकारी से अवगत कराना होगा। ताकि आतंकवादियों के इरादे और उनके हौंसले को निष्फल या परास्त करा का सके। 

आतंकवाद की समस्या संपूर्ण विश्व में महामारी के समान फैलती जा रही है। इस पर रोक लगाना और समय रहते इस गंभीर समस्या का निदान करना अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है। यह लंबे समय से चली आ रही बिमारी है। जिससे संपूर्ण विश्व को छुटकारा प्राप्त करना वैसा ही जरूरी हो गया है जैसे कि एक इंसान को जीवित रहने के लिये हवा,पानी और भोजन की आवश्यकता होती है। आतंकवाद के दुष्प्रभावों के कारण यह कहना यहां उचित होगा कि अब सभी देश मिलकर संयुक्त रूप से ठोस कदम उठायें नहीं तो मानवता के विनाश के लिए हम सभी संयुक्त रुप से जिम्मेदार व उत्तरदायी होंगे। और आने वाली पीढ़ी हमें कभी भी हमारे इस कृत्य के लिये माफ नहीं करेगी। इसके लिये राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति का सहारा लेते हुये प्रत्येक स्तर पर मनोवैज्ञानिक सलाह के साथ अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया जाना चाहिए। निरंतर चलने वाली इस तरह की गतिविधियों के परिणामस्वरूप आतंकवादी हतोत्साहित होंगे तथा आतंकवाद की राह छोड़ने के लिये बाध्य होंगे। हमें आतंकवाद से मुक्ति पाने के लिये सकारात्मक परिणामों को प्राप्त करने हेतू हर संभव प्रयास करना होगा। इसके लिये आतंकवाद के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क को समूल नष्ट करना ही एकमात्र हल होगा।और इस प्रक्रिया में सहयोग देने हेतू संपूर्ण विश्व के साथ हमारे देश के प्रत्येक नागरिक को जिस भी तरह से सहयोग दे सकता है उसे सहयोग देने हेतू सदैव कंधे से कंधा मिला कर उपस्थित रहना चाहिए। आतंकवाद से निपटने के लिए स्कूली स्तर पर बच्चों को शिक्षित एवं तैयार करा जाना भी समय की मांग है। 


रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार

 ramamedia15@gmail.com