अस्थमा की है दिक्कत, इन योगासनों से मिलेगा तुरंत लाभ

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

दुनिया की एक बड़ी आबादी अस्थमा जैसी घातक क्रोनिक बीमारी से परेशान है। वायुमार्ग को प्रभावित करने वाली यह बीमारी, सांस लेने में समस्याओं का कारण बन सकती है। अस्थमा की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। किसी चीज से एलर्जी, वायरस के संक्रमण, तनाव और कई अन्य स्थितियां इस समस्या को ट्रिगर कर सकती हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अस्थमा के कारण वायुमार्ग (ब्रोन्कियल नलियों) के अंदर की दीवारों में सूजन आ जाती है। अस्थमा के अटैक के दौरान वायुमार्ग सूज जाता है और उसके आसपास की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं जिसके कारण से फेफड़ों में हवा का आना-जाना मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति सांस से संबंधित गंभीर समस्या का कारण बन सकती है। साल 

2017 के आंकड़ों के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 8 फीसदी लोगों को अस्थमा की समस्या थी। अस्थमा का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, इसके लक्षणों को कम करने के डॉक्टर दवाइयां देते हैं। आइए इस लेख में योग के माध्यम से अस्थमा की समस्या को ठीक करने के उपायों के बारे में जानते हैं।

गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है अस्थमा की बीमारी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को अस्थमा की बीमारी होती है, उनमें सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट और खांसी की समस्या अक्सर बनी रहती है। कई बार यह समस्याएं दैनिक कार्यों में भी बाधा डाल सकते हैं। कई तरह की स्थितियां सांस फूलने या खांसी की समस्या को ट्रिगर कर सकती हैं, जैसे सीढ़ियां चढ़ना, पराग या धूल के कणों के संपर्क में आना आदि।

अस्थमा के लक्षणों को प्रबंधित करने और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए योग को दिनचर्या में शामिल करना एक प्रभावी तरीका हो सकता है। कई तरह के योगासन अस्थमा की समस्या को काफी हद तक कम करने में सहायता कर सकते हैं।

ब्रिज पोज योगासन

योगगुरु के मुताबिक जिन लोगों को अस्थमा की शिकायत हो उनके लिए ब्रिज पोज योगासन काफी फायदेमंद हो सकता है। यह योग छाती को खोलते हुए गहरी सांस को बढ़ावा देता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं। अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई से थोड़ा अलग करते हुए घुटनों को मोड़ लें। हथेलियों को खोलते हुए हाथ को बिल्कुल सीधा जमीन पर सटा कर रखें। अब सांस लेते हुए कमर के हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं, कंधे और सिर को सपाट जमीन पर ही रखें। सांस छोड़ते हुए दोबारा से पूर्ववत स्थिति में आ जाएं।

भुजंगासन (कोबरा पोज)

पेट और पीठ को आराम दिलाने के साथ यह योग अभ्यास प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूती देता है। इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाइए और हथेली को कंधे के नीचे रखिए। सांस लेते हुए और शरीर के अगले भाग को ऊपर की और उठाएं। 10-20 सेकंड्स के लिए इसी अवस्था में रहिए फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस अभ्यास को नियमित रूप से 10-15 बार किया जा सकता है।

पवनमुक्तासन

अस्थमा के रोगियों के लिए पवनमुक्तासन को भी काफी फायदेमंद माना जाता है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल सीधा लेट जाएं।  अब दोनों पैरों को मिलाते हुए और हथेली को जमीन पर लगाएं। इसके बाद दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए छाती तक लगाएं। फिर अपने दोनों हाथों की उंगलियों को मिलाते हुए घुटने से थोड़ा नीचे होल्ड कर लें। अब पैरों से छाती पर दबाव पड़े तो धीरे-धीरे सांस को अंदर बाहर छोड़ें।