डोली बादल की

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

मनभावन सावन

आया लेकर प्रीत 

प्यार की बोली

सजा मिलन की रुत

डोली बादल की में

पड़े झूले डालियों में

मंगल गीत गूँजे फिजाओं में

खन खन खनके चूड़ियां लाल हरी

कानों में झूलते झुमके

हथेलियों में मुस्काये मेहंदी

साज श्रृंगार से निखरी 

हर सजनी साजन के प्यार में

आया सावन देखो

ले डोली बादल की

प्रीत की मनुहार की।।

वहीं गूँजते शिव के जयकारे

है सावन में शिव की महिमा अपार

माँ पार्वती सा करती तप हर 

कोई मिले वर शिव सा

डोली बादल की यूँ लाती

सपनों अरमानों की लड़ी

मिले फल आस्था का

हो पूरी आस साजन से मिले 

सजनी बंध प्यार की डोरी से।।

भाई भी तके राह जब बहना 

घर आएगी लेकर अपने प्यार का रंग

राखी के धागे में पिरो

डोली बादल की यूँ लाती

भाई बहन को और भी करीब

बांध नेह के रिश्ते में

माँ बाबा की देखते राह जब 

बिटिया आएगी घर ले खुश्बू

सारी अपने बचपन और अल्हड़पन की

न जाने कितने ही अरमान 

न जाने कितने ही सपने

महक उठते हो 

डोली बादल की में

घुल आस्था, प्रीत, प्रेम

सावन की मनभावन छटा में।।


.....मीनाक्षी सुकुमारन

      नोएडा