गुरुदेवो भवः

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

सर्व प्रथम गुरु पूर्णिमा की उन सभी गुरुओं को जिनसे जीवन में हम कुछ न कुछ ज्ञान प्राप्त किए हैं उन्हें मेरा सादर प्रणाम। सभी बंधू सखा को हार्दिक शुभकामनाएं।

गुरु कोई भी हो सकता है फिर चाहे वो माता पिता हो शिक्षक हो धर्म का पाठ पढ़ाने वाले परम गुरू हो या फिर एक बालक भी हो सकते हैं । जिनसे हम कुछ सीखते हैं छोटी या बड़ी ज्ञान प्राप्त करते हैं वो गुरू हैं। हमारे प्रथम गुरू माता पिता हैं  जिनसे हम बोलना, चलना बैठना, आदर सम्मान दुनियादारी आदि हर तरह की पाठ सीखते हैं। शिक्षक अक्षर ज्ञान कराते हुए मेहनत लगन इमानदारी से कार्य करते हुए मंजिल तक पहुंचने का मार्गदर्शन करते हैं। परम गुरू की आवश्यकता हम मानव के साथ ईश्वर को भी होती हैं ।आदि और अंत भी गुरू ही हैं गुरू को भगवान से भी श्रेष्ठ कहा गया है। भगवान के गुरू बृहस्पति देव हैं । धर्म सत्य और ईश्वर से आत्मसात होने का मार्गदर्शन हमें परम गुरू से प्राप्त होता है । गुरु अपने आप में एक संपूर्ण जगत है ।""गु का अर्थ है गूढ़ , रु का रहस्य यानी गूढ़ रहस्यों का ज्ञान जो कराए वो ही गुरु है""

एक साधारण बालक से भी हम सिख सकते हैं।

मेरे क्लास में एक बच्चा था जो दिमाग से बहुत तेज था पर उसके हाथों की उंगलियां फैली हुई थी और मुड़ती नहीं थी, और आँखें भी गोल गोल और बाहर निकली हुई बड़ी बड़ी थी दिल का बहुत अच्छा था। सारे बच्चे यहां तक कि टीचर भी उस पर ध्यान नहीं देते और कुछ से कुछ कह देते जिससे उसके दिल को ठेस लगती ।

एक दिन मैं क्लास में गई तो वो आकर मुझसे लिपट गया और रोते हुए उन टीचर्स की शिकायत की जो उसे भला बुरा कहते थे।

कहा आप बहुत अच्छी हो मैम मुझे मेरी फैली हुई और ना मुड़ने वाली उंगलियों से पेंसिल कैसे पकड़ कर लिखना है सिखाया जिससे आज मैं लिख पा रहा हूं और मेरी लिखावट भी सुधरने लगी है।आप मेरी मां जैसी मैम मां हो।

वो सारे मैम और सर दुष्ट और गंदे हैं । मुझ जैसे बच्चों का क्लास में मजाक उड़ाते हैं , कहते हैं तुम विकलांग हो। तुम जैसे बच्चे के लिए बिकलांग स्कूल है वहीं जाओ यहां हमें भी दिमाग से अपाहिज कर दोगे।

मैम ! हम क्या वो तो पहले से ही मानसिक रूप से अपाहिज है तभी तो शिक्षक होकर भी ऐसी बातें करते हैं। क्या एक शिक्षक को ये शोभा देता है ? वो टीचर कहलाने के लायक नहीं है ।मैम ! देखिए मेरी ऊंगली मुड़ने लगी है और ऊंगली मोड़ कर दिखाने लगा ।

मेरी आंखों से आंसू टपक कर उसके गालों पर गिर गए। उसने मुझे इशारे से नीचे झुकने कहा , मेरे नीचे झुकते ही मेरे आंसू पोंछे और किस करके कहा रोओ नहीं मैम मम्मी ने अपके लिए कुछ दिया है और एक पैकेट निकाल कर दिया। मना मत करना मैम मां ने प्यार से दिया है आपको प्लीज।

और अपने लांच बॉक्स से एक काजू कतली निकाल कर मुझे खिलाते हुऐ उन टीचर्स से कहा जो मेरे पीछे खड़े सब सुन रहे थे आपलोगाें को कभी नहीं दूंगा और आपसे पढ़ूंगा भी नहीं आप सब गंदे हो।

मैं निःशव्द थी कहूं तो क्या कहूं मेरे पिछे वो सारे टीचर्स खड़े आंसु बहा रहे थे।

मैंने कहा नहीं बेटे ऐसा नहीं कहते  सभी शिक्षक अच्छे होते हैं । सबको सामान भाव से देखते और सिखाते हैं । तुमने भी कुछ गलती की होगी जिससे वो गुस्सा होकर तुमसे नाराज हो गए होंगे जैसे अभी तुम नाराज हो।

हमने ये शिक्षा तो नहीं दी न की गुरु का अनादर करना चाहिए नहीं न। चलो सबको सॉरी बोलो ।

गुरु भगवान से भी बड़े होते हैं उनका अनादर कभी नहीं करना चाहिए। हमारे जीवन में वो सारे गुरु होते हैं जिनसे हम कुछ न कुछ सीखते हैं जैसे अभी तुमने हम सबको बहुत कुछ सीखा दिया... तो तुम भी मेरे गुरु हो गए और उसे गले से लगा लिया।


परिचय- रीता मिश्रा तिवारी

 भागलपुर बिहार