मौन बड़ा ही आलम्बन

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

कहकर मिथ्या खुद को खो दूँ,

सच कह दूँ तो रिश्ते टूटे।

इससे तो चुप रहना बेहतर,

रूठे न कोई ना संग छूटे।।

जब शब्दों से ना बात बने,

है मौन बड़ा ही आलम्बन।

दो पल की शब्द-पराजय से,

कोई भी अपना ना रूठे।।

पर इतना भी क्या चुप रहना?

कल बन जाए जो कमजोरी।

सच्चे बैरी भी बेहतर हैं 

क्यों जोड़ूँ मैं साथी झूठे

उलझन फैलाते लोगों संग

चलने से श्रेष्ठ यही लगता,

फाकेपन में ही मस्त रहें

लेकर सपने टूटे-फूटे।।

©डॉ0श्वेता सिंह गौर, हरदोई