सावन का पहला मंगला गौरी व्रत कल, जानिए पूजा

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के लिए सावन का महीना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस पूरे महीने भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। 25 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो चुका है। आज, 26 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है। सावन के सोमवार का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि सावन के सोमवार के बराबर ही मंगलवार का महत्व है। कहा जाता है कि सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याएं खत्म होती हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस साल सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 27 जुलाई को पड़ रहा है।

मंगला गौरी व्रत महत्व-

मंगला गौरी व्रत को ज्यादातर सुहागिनें रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही पति को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को शुरू करने के बाद कम से कम पांच तक रखा जाता है। हर साल सावन में 4 या 5 मंगलवार पड़ते हैं। सावन के आखिरी मंगला गौरी व्रत को उद्यापन का विधान है।

मंगली गौरी पूजा विधि-

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठें।

निवृत्त होकर साफ-सुधरे वस्त्र धारण करें।

इस दिन एक ही बार अन्न ग्रहण करके पूरे दिन माता पार्वती की अराधना करनी चाहिए।

चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां मंगला यानी माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

अब विधि-विधान से माता पार्वती की पूजा करें।

मंगला गौरी व्रत कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मपाल नामक एक सेठ था। वह भोलेनाथ का सच्चा भक्त था। उसके पैसों की कोई कमी नहीं थी। लेकिन उसके कोई पुत्र न होने के कारण वह परेशान रहता था। कुछ समय बाद महादेव की कृपा से उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। लेकिन ये पहले से तय था कि 16 वर्ष की अवस्था में उस बच्चे की सांप के काटने से मृत्यु हो जाएगी। सेठ धर्मपाल ने अपने बेटे की शादी 16 वर्ष की अवस्था के पहले ही कर दी। जिस युवती से उसकी शादी हुई. वो पहले से मंगला गौरी का व्रत करती थी। व्रत के फल स्वरूप उस महिला की पुत्री के जीवन में कभी वैधव्य दुख नहीं आ सकता था. मंगला गौरी के व्रत के प्रभाव से धर्मपाल के पुत्र के सिर से उसकी मृत्यु का साया हट गया और उसकी आयु 100 वर्ष हो गई। इसके बाद दोनों पति पत्नी ने खुशी-खुशी पूरा जीवन व्यतीत किया।