अन्दाज ए लखनऊ

 

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

उमड़-घुमड़ बरसो मेघा 

ब्वाल्य पपीहा-कोयलिया,

वउ डाल-डाल परि नाचैं  

उड़े अकास मा चातक ज्यों ,

नयना बूंदन कउ तरसें 

पंख पसारे ह्य आसमां,

वारिद से कण-कण ब्वाल्य 

उमड़-घुमड़ बरसो मेघा |

 कवि- कुमार प्रिंस रस्तोगी

लखनऊ,उत्तर प्रदेश ....