गुरु पूर्णिमा : इन दिन पीपल के वृक्ष की जड़ों में मीठा जल डालना चाहिए, मां लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पावन त्योहार मनाया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महार्षि व्यास को सबसे पहले गुरु की उपाधि दी गई। उन्होंने चारों वेदों का ज्ञान दिया। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु को सम्मान देकर उनका आशीर्वाद लें। 

इस दिन जल में हल्दी मिलाकर घर के मुख्य द्वार की सफाई करें। इस दिन किसी के लिए अपशब्द न कहें। किसी स्त्री या बुजुर्ग का अपमान भूलकर भी न करें। घी का दीप जलाकर भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। गुरु पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ों में मीठा जल डालना चाहिए, ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

 गुरु पूर्णिमा की शाम को पति-पत्नी मिलकर यदि चंद्रमा का दर्शन करें और चंद्रमा को गाय के दूध का अर्घ्य दें तो दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। आषाढ़ पूर्णिमा की शाम तुलसी जी के सामने शुद्ध देशी घी का दीपक जलाएं। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की विधि विधान से पूजा करें। आटे की पंजीरी का प्रसाद बनाकर भगवान श्री हरि विष्णु को भोग लगाएं। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु का ध्यान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं। इस दिन जरूरतमंदों को पीले अनाज, पीले वस्त्र और पीली मिठाई का दान दें। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन श्रीहरि विष्णु जी स्वयं गंगाजल में निवास करते हैं। पूर्णिमा तिथि पर स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन किसी मंदिर के भंडारे में अनाज और शुद्ध घी का दान करें। इससे भी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।